April 22, 2026
National

पहलगाम हमले के एक साल: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से आतंक का खात्मा, 93 दिन में मिला न्याय

One year after the Pahalgam attack: ‘Operation Sindoor’ ended terror, justice was delivered in 93 days

22 अप्रैल । बीते वर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या की गई। इनमें से 25 पर्यटक थे। बुधवार को इसे एक वर्ष पूरा हो गया। इस एक वर्ष के भीतर भारतीय सेना ने न केवल यह कायरतापूर्ण हमला करने वाले आतंकवादियों को मार गिराया, बल्कि पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादी कैंपों को भी ध्वस्त कर दिया।

पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया था। इस ऑपरेशन में आतंकवादियों के कई ठिकाने पूरी तरह नष्ट कर दिए गए और बड़ी संख्या में वहां मौजूद आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को भारत की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय चरित्र का प्रतीक बताया था। रक्षा मंत्री का कहना था कि यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्र के साहस और संयम का प्रतीक है। राजनाथ सिंह के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर इतिहास में केवल एक सैन्य अभियान के रूप में नहीं, बल्कि भारत के नैतिक अनुशासन, रणनीतिक स्पष्टता और मानवीय गरिमा के उदाहरण के रूप में दर्ज होगा।

वहीं बीते वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता प्रदर्शित की गई। लालकिले पर आयोजित समारोह में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का गौरव दर्शाया गया। लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराते ही, भारतीय वायु सेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर, लाल यहां आसमान पर दिखाई दिए। इनमें से एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए था और दूसरा हेलीकॉप्टर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को दर्शाने वाला ध्वज लिए हुए था। दोनों हेलीकॉप्टर ने आयोजन स्थल पर फूलों की वर्षा की।

हेलीकॉप्टर पर लगे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ध्वज ने यहां मौजूद हजारों भारतीयों को गौरवान्वित किया व आत्मविश्वास से भर दिया। इस बीच विश्व के अनेक देशों ने यह माना कि पहलगाम में आतंकवादियों ने जो किया वह वह पीड़ितों के प्रति घोर क्रूरता थी। आतंकवादियों के खिलाफ प्रारंभ किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उद्देश्य पाकिस्तान से प्रायोजित हो रहे आतंकवाद को रोकना था।

बीते वर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ वह आतंकी हमला पूरे देश को झकझोर देने वाला था। पर्यटकों की पहचान पूछ कर उनकी निर्मम हत्या की गई। इस आतंकी वारदात ने न केवल मानवता को शर्मसार किया, बल्कि समूचे देश में आक्रोश भी पैदा किया। वहीं, भारतीय सेना पूरे 93 दिनों तक ऑपरेशन महादेव के तहत इन आतंकियों की घेराबंदी में जुटी रही। पैरा स्पेशल फोर्सेस की एक टीम ने बेहद कठिन रास्तों पर इस ऑपरेशन में करीब 250 किलोमीटर तक आतंकियों का पीछा किया।

28 जुलाई 2025 को ऑपरेशन महादेव अपने अंजाम तक पहुंचा और आतंकियों को ढेर कर दिया गया। इसके लिए अंतिम दौर में बेहद जटिल क्षेत्र में 10 घंटे में 3 किलोमीटर की पैदल घेराबंदी की गई। सटीक और तेज कार्रवाई में तीनों आतंकियों को मार गिराया गया। इस तरह 93 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में करीब 250 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद न्याय सुनिश्चित किया गया। पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद ही भारतीय सेना की टीमें मौके पर पहुंच गई थीं और जांच शुरू की।

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मौके पर मौजूद एक सैन्य अधिकारी की जानकारी के आधार पर तीन पाकिस्तानी आतंकियों की पहचान की गई। खुफिया तंत्र, ह्यूमन इंटेलिजेंस, तकनीकी इनपुट और हमले में बचे लोगों की मदद से आतंकियों के नाम सामने आए। आतंकियों के नाम सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिब्रान थे। ये तीनों आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे।

इसके बाद आतंकियों की तलाश में सेना का एक व्यापक और सुनियोजित अभियान शुरू हुआ। सुरक्षा बलों ने बिना समय गवाए आतंकियों के भागने के सभी संभावित रास्तों को सील कर दिया। आतंकियों की हर गतिविधि पर नजर रखी गई। समय, स्थान और संसाधनों के विश्लेषण के आधार पर ऑपरेशन को लगातार अपडेट किया गया और अंत में तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया।

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