24 अप्रैल । दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में पूर्व कांग्रेस पार्षद इशरत जहां की जमानत के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। 14 मार्च 2022 को कड़कड़डूमा कोर्ट से नियमित जमानत मिली थी।
दिल्ली पुलिस ने इशरत जहां की जमानत को रद्द करने की अपील करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। शुक्रवार को हाईकोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने इशरत जहां को दी गई जमानत में दखल देने से इनकार कर दिया।
बेंच ने कहा कि इशरत जहां को राहत मिले हुए चार साल से अधिक समय बीत चुका है और ट्रायल कोर्ट की ओर से लगाई गई शर्तों के उल्लंघन का कोई आरोप नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है।
दिल्ली पुलिस ने अपनी अपील में दलील दी थी कि ट्रायल कोर्ट ने अहम सबूतों को नजरअंदाज किया और जमानत देने में गलती की, जबकि आरोप थे कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काने की एक ‘पहले से सोची-समझी साजिश’ रची गई थी।
अपील में यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट का आदेश तय कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ था और उसमें गंभीर कमियां थीं। इसमें कहा गया कि इशरत जहां ने उन विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जो कथित तौर पर दंगों में बदल गए थे। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया और जमानत के आदेश को बरकरार रखा।
जनवरी 2024 में, एक ट्रायल कोर्ट ने इशरत जहां और कई अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। इन आरोपों में दंगा करना, गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा होना और हत्या का प्रयास जैसे अपराध शामिल थे। इसके अलावा, अप्रैल 2024 में एक स्थानीय कोर्ट ने इशरत जहां की जमानत की शर्तों में कुछ बदलाव किए। कोर्ट ने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से बाहर भी वकालत करने की अनुमति दी।
बता दें कि पूर्व कांग्रेस पार्षद को फरवरी 2020 में दंगों से जुड़ी एक बड़ी साजिश के मामले में गिरफ्तार किया गया था।


Leave feedback about this