May 16, 2026
Entertainment

कवि मंगलेश डबराल की रचनाओं में सामाजिक अन्याय और पाखंड के खिलाफ उठती थी आवाज

Poet Manglesh Dabral’s works spoke out against social injustice and hypocrisy.

आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर, कवि, गद्यकार और वरिष्ठ पत्रकार मंगलेश डबराल हिंदी साहित्य जगत का एक ऐसा नाम है, जिनकी कविताएं पाठक को एक अलग अपनी दुनिया में ले जाती हैं, जो उसे अपनी ही लगती है। सरल, सौम्य और विनम्र व्यक्तित्व वाले कलमकार ने अपनी कविताओं में इंसानी संवेदनाओं को गहराई से उकेरा।

मंगलेश डबराल का जन्म 16 मई 1948 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के काफलपानी गांव में हुआ था। वह दिल्ली आए और उन्होंने प्रतिपक्ष जैसे पत्रों में काम किया।

मंगलेश डबराल आधुनिक हिंदी कविता के उन महत्वपूर्ण कवियों में शामिल हैं जिन्होंने कविता में नए अनुभव और संवेदनाएं जोड़ीं। उनकी कविताओं में देशज महक के साथ इंसान के रागात्मक पक्षों को खूबसूरती से चित्रित किया गया है। उनके प्रकाशित कविता संकलनों में पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं और आवाज भी एक जगह है। उन्होंने राजस्थान के शिक्षक कवियों की कविताओं के संकलन रेत घड़ी का संपादन भी किया।

वह विश्व साहित्य के प्रमुख कवियों पाब्लो नेरुदा, एर्नेस्टो कार्डिनल आदि के अनुवादक भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने हरमन हेस के उपन्यास सिद्धार्थ और बांग्ला लेखक नवारो भट्टाचार्य के संग्रह का भी सह-अनुवाद भी किया है।

एक इंटरव्यू में मंगलेश डबराल ने बताया था कि कविता लिखने के बाद रचनाकार के अनुभव की मृत्यु हो जाती है और रचना का जीवन शुरू होता है। उन्होंने रघुवीर सहाय के कथन “कविता हुई नहीं कि मरी” को सही ठहराया। उन्होंने पत्रकारिता और कविता के बीच के संबंध पर कहा कि पत्रकारिता उन्हें शोर देती है और कविता उस शोर को संगीत में बदलने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन पत्रकारिता ने उनकी कविता को गहराई दी है।

मंगलेश डबराल नागार्जुन को आदर्श मानते थे। वे उन विफल और संघर्षरत लोगों को श्रद्धांजलि देते रहे जो रास्ते में गिर पड़े लेकिन कोशिश करते रहे। उनकी कविताएं पाखंड, धूर्तता और सामाजिक अन्याय के खिलाफ भी बोलती हैं। मितभाषी और अपनी मान्यताओं में दृढ़ मंगलेश डबराल हिंदी साहित्य की उस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं, जिसमें कविता समाज और मनुष्य की सच्चाई को बिना शोर के व्यक्त करती है।

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