July 4, 2026
National

‘ऐसे लोगों की बातों को सीरियस नहीं लेना चाहिए,’ दिग्विजय सिंह के आरोपों पर बोला संत समाज

“One should not take what such people say seriously,” said the community of seers regarding Digvijaya Singh’s allegations.

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हाल ही में आरोप लगाया था कि मंदिर की बहुमूल्य भूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक ट्रस्ट को कौड़ियों के भाव आवंटित की गई और दान राशि का अनियमितताओं के जरिए दुरुपयोग किया जा रहा है। उनके इस बयान पर संत समाज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोपों को निराधार बताया है।

निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर प्रेमानंद गिरि महाराज ने दिग्विजय सिंह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “आजकल लोग सिर्फ मंदिरों पर ही आरोप लगाते हैं, क्योंकि ऐसा करना सबसे आसान है। कुछ पॉलिटिशियन हो या कोई अन्य समाज का व्यक्ति हो, मंदिरों पर आरोप लगा देता है और वो हिंदुओं को कमजोर समझता है। समाज को ऐसे लोगों की बातों को सीरियस नहीं लेना चाहिए। ऐसे व्यक्ति, जो कभी भी किसी के बारे में कुछ भी बोल देते हैं, उन्हें गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।”

प्रेमानंद गिरि महाराज ने यह भी दावा किया कि महाकाल मंदिर की आय और व्यय पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित होते हैं। उनके अनुसार, मंदिर प्रशासन कलेक्टर स्तर की निगरानी में काम करता है और सभी वित्तीय प्रक्रियाओं का ऑडिट होता है। उन्होंने कहा कि मंदिर से प्राप्त धन का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, गौशालाओं, वेद विद्यालयों और अन्नक्षेत्र जैसी सेवाओं में किया जाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि महाकाल मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की अनियमितता की बात तथ्यहीन है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के आसपास जो भी विकास कार्य हो रहे हैं, वे सरकार की अनुमति और नियमानुसार किए गए आवंटन के तहत हैं। यदि किसी को इस पर आपत्ति है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

वहीं, दादूराम आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज ने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए व्यापक तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए होटल समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि यदि चंदे या दान के माध्यम से कोई निर्माण कार्य किया जा रहा है तो यह सकारात्मक पहल है। हालांकि, ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। यदि किसी को कोई आपत्ति है तो उसे तथ्यों के साथ जनता के सामने अपनी बात रखनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उनके अनुसार, विकास कार्यों को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे धार्मिक स्थलों की छवि प्रभावित होती है।

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