June 10, 2026
Entertainment

रमेश सिप्पी ने बताया क्यों हेमा मालिनी ने ‘शोले’ और ‘सीता और गीता’ में हीरो से भी ज्यादा छोड़ा असर

Ramesh Sippy explained why Hema Malini made a greater impact than even the male leads in ‘Sholay’ and ‘Seeta Aur Geeta’.

बॉलीवुड अभिनेत्री हेमा मालिनी को लोग ‘ड्रीम गर्ल’ कहकर बुलाते हैं। उनकी फिल्मों ने जहां दर्शकों का दिल जीता, वहीं उनके किरदार ने दिलों पर अलग ही छाप छोड़े। हेमा मालिनी की इसी खासियत को लेकर मशहूर फिल्मकार रमेश सिप्पी ने आईएएनएस संग बातचीत में बताया कि आखिर क्यों वह अपनी फिल्मों में इतनी यादगार बन गईं।

आईएएनएस से बात करते हुए रमेश सिप्पी ने कहा, ”हेमा मालिनी की असली ताकत उनका स्क्रीन पर मौजूद होना था। ‘सीता और गीता’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों में उनका किरदार इतना दमदार था कि दर्शक उन्हें लंबे समय तक भूल नहीं पाए। वह जब अभिनय करती थीं, तो अपने किरदार में एक अलग तरह की एनर्जी लेकर आती थी। यही वजह है कि उनकी हर भूमिका खास बन जाती थी।”

उन्होंने कहा, ”हेमा मालिनी की काबिलियत उनकी मेहनत का नतीजा थी। वह इतनी अच्छी कलाकार थीं कि वे कई बार कहानी में मौजूद बड़े पुरुष किरदारों पर भी भारी पड़ जाती थीं। एक कलाकार के अंदर जो चमक होती है, वही स्क्रीन पर दिखाई देती है और हेमा में वह चमक पूरी तरह मौजूद थी।”

दरअसल, यह बातचीत हेमा मालिनी के फिल्मी करियर के 60 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान की गई। इस कार्यक्रम में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग शामिल हुए।

इसके अलावा, एक पुराने इंटरव्यू में जब ‘शोले’ फिल्म के 50 साल पूरे होने पर हेमा मालिनी से बात की गई थी, तो उन्होंने अपने शूटिंग के दिनों की कुछ यादें साझा की थीं। उन्होंने बताया था, ”शूटिंग के दौरान मेरी मां को मेरी बहुत चिंता रहती थी, खासकर तब जब तेज गर्मी में नंगे पैर शूटिंग करनी पड़ती थी। गर्म रेत और पत्थरों पर चलना आसान नहीं था, क्योंकि वे चिलचिलाती धूप में बहुत ज्यादा गर्म हो जाते थे।”

हेमा मालिनी ने बताया, ”मेरी मां चाहती थीं कि मैं पैरों में कुछ ऐसा पहन लूं, जिससे चोट से बचा जा सके, लेकिन यह ज्यादा समय तक टिका नहीं रह पाया। जब निर्देशक रमेश सिप्पी ने यह देखा, तो उन्होंने इसे हटाना के लिए कहा, क्योंकि फिल्म में यह स्क्रीन पर दिख सकता था। इसके बाद मुझे बिना किसी सुरक्षा के ही शूटिंग करनी पड़ी, जो काफी मुश्किल अनुभव था।”

आज ‘शोले’ को भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक फिल्मों में गिना जाता है। पिछले साल इस फिल्म ने अपने 50 साल पूरे किए, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

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