18 जुलाई । दिल्ली के जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस की ओर से अस्पताल में भर्ती कराए जाने पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र खत्म हो रहा है, सिसकियां ले रहा है।
नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि भारत के अंदर लोकतंत्र खत्म होता जा रहा है, तानाशाही मजबूत होती जा रही है।
राशिद अल्वी ने कहा कि सोनम वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। अपनी जान की परवाह न करते हुए वे देश और युवाओं के हित में अनशन कर रहे थे, लेकिन सरकार पूरी तरह सोई रही। सरकार ने एक बार भी उनसे बातचीत करने की कोशिश नहीं की। प्रधानमंत्री हो या फिर कोई मंत्री, कोई अधिकारी या ब्यूरोक्रेट उनसे बात कर सकता था, लेकिन किसी ने बात करना ठीक नहीं समझा। वांगचुक की समस्या क्या है, क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी कि वे उनसे पूछती, उनका पक्ष जानती या फिर अपना पक्ष रखती।
उन्होंने कहा कि इसीलिए मैं बार-बार कहता हूं कि यह तानाशाही सरकार है। लोकतंत्र खत्म हो रहा है, सिसकियां ले रहा है। वांगचुक की बात सुनने के बजाय, उनके जख्मों पर मरहम लगाने के, उन्हें उठाकर जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। यह देश में लोकतंत्र की दयनीय स्थिति का बड़ा सबूत है।
राशिद अल्वी ने सोनम वांगचुक की पत्नी के बयान का समर्थन देते हुए कहा कि मैं उनकी पत्नी के बयान से सहमत हूं। मौजूदा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है। ये कुछ भी सकती है। अस्पताल इनके हैं, सरकार इनकी है, सरकारी डॉक्टरों पर दबाव बनाया जा सकता है। इसलिए उनकी पत्नी जो कुछ कह रही हैं, उनकी बात माननी चाहिए। अगर इस तरह की घटनाएं होती रहीं तो देश के लोग इन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे।
उन्होंने आशंका जताते हुए कहा, “उन्हें जानबूझकर हटाया गया है। यह सरकार कुछ भी कर सकती है। अगर गोली चलाने की जरूरत पड़ी तो ये रुकेंगे नहीं। डंडे का इस्तेमाल करते हैं। मुझे बार-बार कहना पड़ता है कि देश के अंदर लोकतंत्र सिसकियां ले रहा है।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सुबह हाईकोर्ट के निर्देशों और रोजाना की जांच शेड्यूल के मुताबिक, डॉक्टर सोनम वांगचुक की मेडिकल जांच के लिए पहुंचे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसमें रुकावट डाली, जिससे थोड़ी अफरा-तफरी मच गई। वांगचुक की नाजुक सेहत और डॉक्टरों की सलाह को ध्यान में रखते हुए उन्हें मेडिकल जांच और आगे के इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने जांच की है और पाया कि लंबे समय तक उपवास रखने के कारण वे कमजोर हो गए हैं तथा उनमें डिहाइड्रेशन के लक्षण हैं। उन्हें निगरानी में रखा गया है। वहां और टेस्ट किए जा रहे हैं तथा विशेषज्ञों की देखरेख में उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है।


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