August 10, 2026
National

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश पर केजरीवाल ने उठाए सवाल

Kejriwal raises questions over the recommendation to appoint Justice Ashwani Kumar Mishra as Chief Justice of the Punjab and Haryana High Court.

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए जाने की सिफारिश की है। इस सिफारिश के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायाधीशों की पदोन्नति प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पोस्ट में कहा कि ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट जाने की बहुत जल्दी है। क्या जजों को सीनियरिटी को नजरअंदाज करके, बिना बारी के सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट किया जाना चाहिए? इससे ‘लेनदेन’ की गुंजाइश बन सकती है। अरविंद केजरीवाल ने आगे लिखा कि किसी जज को सुप्रीम कोर्ट भेजने से पहले किन चीजों की जांच की जाती है? क्या शासक के प्रति वफादारी देखी जाती है? क्या लोगों को यह पता नहीं होना चाहिए? वे युवा पीढ़ी को क्या मुंह दिखाएंगे?

पूर्व सीएम केजरीवाल ने आगे लिखा कि बिना बारी के और अपारदर्शी तरीके से प्रमोशन की इजाजत नहीं होनी चाहिए। खासकर उन मामलों में जहां कानून को ताक पर रखकर सरकार को खुश करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि हमें अदालतों के हथियार की तरह इस्तेमाल होने से सावधान रहना चाहिए। लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए अदालतों की ईमानदारी सबसे जरूरी है।

बता दें कि जून में ही, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया था। 16 नवंबर 1968 को जन्मे न्यायमूर्ति मिश्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की उपाधि प्राप्त की।

उन्होंने 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और मुख्य रूप से दीवानी, संवैधानिक और सेवा कानून के क्षेत्र में वकालत की। उन्होंने नोएडा, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, आईएफएफसीओ, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और उत्तर प्रदेश विद्युत निगम सहित कई वैधानिक और सार्वजनिक निकायों के लिए पैरवी की। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों में वरिष्ठ वकील के रूप में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व भी किया।

न्यायमूर्ति मिश्रा को 2013 में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था। 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश बन गए। 20 जुलाई 2025 तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपनी सेवाएं दीं, जिसके बाद उनका तबादला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में हो गया।

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