August 12, 2026
Entertainment

बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र में एसआईआर के बाद मेरा वोट देने का अधिकार हटा दिया गया, ये कैसा मजाक है : प्रकाश राज

My right to vote in the Bengaluru constituency was revoked after the SIR; what kind of a joke is this? – Prakash Raj

अभिनेता प्रकाश राज ने दावा किया है कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया है। अभिनेता ने मंगलवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा कर इस मामले की जानकारी दी। वीडियो में प्रकाश राज ने बताया कि एसआईआर के बाद बेंगलुरु क्षेत्र के उन लाखों मतदाताओं में उनका नाम भी शामिल है, जिनका वोट देने का अधिकार छीन लिया गया है। उन्होंने पूरे मामले को व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘जोक’ बताया।

प्रकाश राज ने वीडियो में कहा, ”दोस्तों, मैं आपके साथ एक जोक शेयर करना चाहता हूं। मैं उन 65 लाख वोटर्स में से एक हूं, जिनका बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र में एसआईआर के बाद वोट देने का अधिकार हटा दिया गया है। अच्छा मजाक है, है ना?” उन्होंने कहा, ”मेरा जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ है और मैं लंबे समय से इसी इलाके में रह भी रहा हूं। मेरा स्कूल, कॉलेज और थिएटर भी यहीं रहा है और आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं इसी निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव का उम्मीदवार भी रह चुका हूं।”

अभिनेता ने आगे कहा, ”गेम ऑन। देखते हैं कि अपना वोटर आईडी वापस पाने के लिए मुझे क्या प्रक्रिया अपनानी होगी। कौन-कौन से दस्तावेज दिखाने होंगे, यह भी देखता हूं।”

प्रकाश राज ने कहा, ”सत्ता में बैठे लोग अपनी ताकत का इस्तेमाल कुछ नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने के लिए कर सकते हैं, जो शायद आपको वोट न दें। लेकिन मेरे दोस्त, क्या आप हमें उस ताकत से रोक सकते हैं, जिसके जरिए हम आपको सत्ता से बाहर कर सकते हैं?” अपने वीडियो के आखिर में उन्होंने कहा, ”बस पूछ रहा हूं। बाय।”

उनके इस बयान के बाद एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बहस और तेज हो गई है।

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पहले से ही कई सवाल उठते रहे हैं। लेकिन इस पर निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में तय नियमों का पालन किया जाता है। आम तौर पर मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोगों, डुप्लीकेट नामों और बार-बार सत्यापन के बावजूद जिन मतदाताओं का पता नहीं चल पाया, उनके नाम हटाए जाते हैं।

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