महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार के मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस बारे में जानकारी दी। मंत्री प्रताप सरनाईक ने मीडिया से कहा, “महाराष्ट्र में करीब 10 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक काम कर रहे हैं, जिनमें से करीब 5 लाख अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र में हैं। हमने कई लोगों को मराठी सीखने में मदद की है और 2 अक्टूबर से 23 जनवरी तक, गांधी जयंती से शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जयंती तक, हमने बालासाहेब ठाकरे के नाम पर यह मराठी भाषा अभियान शुरू किया है।”
उन्होंने बताया, “हमारे बहुत सारे कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के लोग यहां पर सभी रिक्शा और टैक्सी चालकों को आमंत्रित कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि अब तक एक लाख 65 हजार 800 लोगों को मराठी सिखाई गई है। यह अभियान लगातार चलाया जा रहा है ताकि मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में काम करने वाले चालक मराठी भाषा में सहज रूप से बात कर सकें।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री प्रताप सरनाईक ने परिवहन से जुड़े एक और अहम फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “आरटीओ की बैठक में हमने प्रस्ताव रखा था कि टू-व्हीलर पूरी तरह से ईवी यानी इलेक्ट्रिक होनी चाहिए।”
उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने उनका यह प्रस्ताव मंजूर भी कर लिया था। हालांकि कुछ ओला, उबर जैसी कंपनियों ने कहा है कि उनके पास पहले से ही पेट्रोल पर चलने वाली गाड़ियां हैं, तो वे इतनी जल्दी इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट नहीं हो पाएंगी। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री की ओर से इन कंपनियों को 9 महीने का अतिरिक्त समय दे दिया गया है।
सरकार का मानना है कि मराठी भाषा को बढ़ावा देने और ई-व्हीकल को अपनाने से न सिर्फ स्थानीय संस्कृति मजबूत होगी बल्कि पर्यावरण के लिए भी यह कदम फायदेमंद साबित होगा।


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