उत्तराखंड वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के नियमों के अनुसार एक नया निकाहनामा तैयार कर रहा है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा है कि इसका मकसद मुस्लिम समुदाय को उन मुश्किलों और अपराधों से बचाना है जिनका सामना उन्हें करना पड़ सकता है।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से नए निकाहनामा के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बना। यूसीसी लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लग गई है, तीन तलाक पर पाबंदी है और हलाला जैसी प्रथाओं को अपराध माना गया है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने अपनी पिछली बैठक में मुस्लिम समुदाय के लिए एक नया निकाहनामा लाने का फैसला किया, ताकि यूसीसी का सख्ती से पालन हो सके।”
शादाब शम्स ने कहा, “नए निकाहनामे से समाज में जागरूकता आएगी और लोग इन समस्याओं से बच सकेंगे। कोई भी व्यक्ति अब एक से अधिक शादी नहीं कर पाएगा। अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों में एक व्यक्ति एक ही पत्नी के साथ रहता है, और यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। ये सभी बातें निकाहनामे में लिखी जाएंगी, ताकि कोई किसी को धोखा न दे सके।”
उन्होंने कहा कि निकाहनामे के साथ लगे हलफनामे में दी गई जानकारी भी पूरी तरह सच होनी चाहिए। अगर कोई इसका उल्लंघन करता है या गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हमने इसी दिशा में यह निकाहनामा तैयार किया है। हम सभी जानते हैं कि राज्य में कई बार माहौल तब खराब हुआ है जब किसी ने धर्म बदलकर शादी की है। चूंकि सभी मस्जिदें और मदरसे वक्फ बोर्ड के अंतर्गत आते हैं, और कुछ वक्फ संपत्तियां भी बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में हैं, इसलिए यह वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि कोई गड़बड़ न हो और नियमों का उल्लंघन करने पर जवाबदेही तय की जाए।
शादाब शम्स ने आगे कहा, “इसलिए वक्फ बोर्ड उन्हीं निकाह कराने वाले काजी और इमामों की नियुक्ति करेगा, जो सही लाइन के ऊपर निकाह पढ़ा पाएंगे। यानी निकाह वही काजी और इमाम करा पाएंगे, जिन्हें वक्फ बोर्ड नियुक्त करेगा। इसी निकाहनामे पर निकाह होगा। अलग से किसी दस्तावेज पर निकाह नहीं होगा। काफी बड़ा निकाहनामा है, जिसमें विस्तृत और सही जानकारी देनी होगी।”
वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने यह भी कहा कि निकाह के समय लोगों को जागरुक कर दिया जाएगा कि किसी का धर्मपरिवर्तन कराकर निकाह कराएंगे तो वह अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। अब धर्म परिवर्तन कराकर किसी बच्ची का निकाह नहीं हो सकता है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा, “अगर दो अलग-अलग धर्मों के लोगों को शादी करनी है तो कोर्ट जा सकते हैं। ऐसा नहीं होगा कि घर पर किसी को बुलाकर उसका धर्म परिवर्तन कराएं और निकाह करा दें। अब इसके ऊपर रोक रहेगी। इससे यह भी फायदा होगा कि किसी मौलाना को किसी कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसलिए वे न गलत करेंगे और न उन्हें सजा मिलेगी। इसलिए समाज को सही दिशा देने का काम यह वक्फ का नया निकाहनामा करेगा।”


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