दिवाली से पहले, आरोहन वेलफेयर सोसाइटी ने शुक्रवार को दिव्यांग बच्चों और महिलाओं द्वारा बनाए गए खूबसूरत दीयों और मोमबत्तियों को प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया। यह प्रदर्शनी महज दिवाली उत्पादों का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता, कड़ी मेहनत और आत्मनिर्भरता और सम्मान की ओर उनकी यात्रा का उत्सव थी।
प्रदर्शनी को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। लायंस क्लब जगाधरी-यमुनानगर; अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल; इनर व्हील क्लब; बलराज हाइड्रो; सुदर्शन फाउंडेशन; और अमर ज्वैलर्स ने प्रदर्शनी का दौरा किया, बच्चों के काम की सराहना की और उनके हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए ऑर्डर दिए।
अतिथि गुरमीत चावला, सामाजिक कार्यकर्ता शिवानी जुनेजा, वंदना सपरा, पूजा और सोनिया ने प्रदर्शनी का दौरा किया और बच्चों द्वारा तैयार किए गए सुंदर दीयों और मोमबत्तियों की सराहना की। बॉलीवुड और पॉलीवुड से जुड़े कलाकारों और जगाधरी स्थित करियर डिफेंस स्कूल की टीम ने बच्चों की प्रतिभा को सराहने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए आगे कदम बढ़ाया। आरके प्रोडक्शन से जुड़े कलाकारों और टीम ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना की और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर आरोहन वेलफेयर सोसाइटी की संस्थापक स्वर्गीय ऋतु सोनी के योगदान को याद किया गया। उन्होंने दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए कौशल और अवसर प्रदान करने की दृष्टि से इस पहल की शुरुआत की थी। उनकी यह सोच आज भी सोसाइटी और उसके कार्यों को प्रेरित करती है।
संस्था के प्रमुख अनिल सोनी ने कहा, “इन बच्चों को सहानुभूति से कहीं अधिक अवसरों और सम्मान की आवश्यकता है। जब लोग उनके द्वारा बनाए गए उत्पाद खरीदते हैं, तो वे केवल एक दीया या मोमबत्ती ही नहीं खरीद रहे होते हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर उनके सफर में भी सहयोग कर रहे होते हैं।”
कोषाध्यक्ष उषा सोनी ने कहा कि हर दीया और मोमबत्ती बच्चों की मेहनत, धैर्य और रचनात्मकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संस्था के सहयोग से बच्चों को आत्मविश्वास मिला और उन्हें और अधिक हासिल करने की प्रेरणा मिली। समन्वयक रेखा ठकराल ने कहा, “हमारा उद्देश्य यह है कि लोग इन उत्पादों को सहानुभूतिवश नहीं, बल्कि इनके पीछे छिपी प्रतिभा और मेहनत की सराहना करते हुए खरीदें। हर ऑर्डर प्रोत्साहन का स्रोत बनता है और इन बच्चों को आत्मनिर्भरता के एक कदम और करीब ले जाता है।”


Leave feedback about this