October 26, 2026
National

जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग तेज, संविधान बनाने का अल्टीमेटम; जारी रहेगी भूख हड़ताल

दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ के गठन और चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। छात्रों ने 26 अक्टूबर को कुलपति को अपनी मांगों का एक औपचारिक पत्र सौंपा। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्रों की सबसे प्रमुख मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन 20 दिसंबर तक छात्र संघ का संविधान तैयार कर उसे मंजूरी दे। इसके बाद संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर छात्र संघ चुनाव की तारीख की औपचारिक घोषणा की जाए।

छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि चुनाव कराने की स्पष्ट समय सीमा चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर की गई कार्रवाई वापस लेने की मांग भी की है। छात्रों ने आंदोलन के सिलसिले में की गई सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लेने की मांग भी उठाई है। छात्रों के मुताबिक इनमें इसमें कारण बताओ नोटिस, निलंबन, परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध और विश्वविद्यालय से निष्कासन जैसी कार्रवाइयां शामिल हैं।

उन्होंने यह भी मांग की है कि इस विरोध प्रदर्शन के संबंध में आगे कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए। मांगपत्र में छात्रों ने मुख्य सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग भी रखी है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है और इसके लिए किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र से माफी मांगने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

कुलपति को सौंपे गए पत्र में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी मांगों पर स्पष्ट रुख अपनाने और छात्र संघ के गठन की प्रक्रिया को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि आंदोलन समाप्त करने के लिए प्रशासन की ओर से ठोस व सकारात्मक प्रतिबद्धता जरूरी है। छात्रों का जोर एक लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए छात्र संघ के गठन पर है।

छात्र चाहते हैं कि चुनाव की प्रक्रिया केवल आश्वासनों तक सीमित न रहे बल्कि इसके लिए संविधान को मंजूरी देने से लेकर चुनाव की तारीख घोषित करने तक की समयसीमा तय हो। फिलहाल छात्रों ने भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। छात्रों का कहना है कि अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और मांगों पर प्रशासन के अगले कदम पर उनकी नजर रहेगी।

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