सिरसा के 75 वर्षीय वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वीपी गोयल ने उपनिषदों, गीता और भागवत के अपने ज्ञान के आधार पर ‘ओम’ के वैज्ञानिक आधार की खोज करने वाली एक पुस्तक प्रकाशित की है। ‘ओम का वैज्ञानिक आधार’ नामक पुस्तक का विमोचन ओडिशा के पूर्व राज्यपाल गणेशीलाल और लखनऊ स्थित चिन्मय मिशन के स्वामी कौशिक चैतन्य महाराज ने मंगलवार को सिरसा में किया।
गोयल कहते हैं कि यह पुस्तक ‘ओम’ का विश्लेषण न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बल्कि वैज्ञानिक तर्क के माध्यम से भी करती है। उनके अनुसार, ‘ओम’ एक सार्वभौमिक ध्वनि, कंपन और ऊर्जा का रूप है जिसका वर्णन प्राचीन भारतीय ग्रंथों में मिलता है। यह पुस्तक बताती है कि कैसे यह ध्वनि या कंपन मानव शरीर के साथ परस्पर क्रिया करता है और ऊर्जा, गतिविधि और विचार को प्रभावित करता है, साथ ही इन विचारों की वैज्ञानिक दृष्टि से जांच करती है।
लॉन्च के अवसर पर मनीष सिंगला, वजीर चंद गर्ग और डॉ. तुषार गोयल सहित कई लोग उपस्थित थे। गोयल ने कहा कि उनका मानना है कि उनका काम प्राचीन ग्रंथों और वैज्ञानिक अवधारणाओं दोनों का उपयोग करके ‘ओम’ की व्याख्या करने के पहले विस्तृत प्रयासों में से एक है। यह पुस्तक अमेज़न, फ़्लिपकार्ट और सर्चबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।


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