बहादुरगढ़ में स्थित एक चमड़ा निर्माण इकाई को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कई पर्यावरणीय उल्लंघनों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद बंद करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, झज्जर जिला प्रशासन ने अधिकारियों को प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों के खिलाफ निगरानी और प्रवर्तन को तेज करने का निर्देश दिया है।
यह नोटिस राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित एक संयुक्त समिति के निरीक्षण के बाद जारी किया गया है, जिसमें पाया गया कि इकाई का अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) ठीक से काम नहीं कर रहा था। एक अधिकारी ने बताया कि बाईपास व्यवस्था के माध्यम से छोड़े गए अपशिष्ट जल को एकत्र कर विश्लेषण के लिए बोर्ड की प्रयोगशाला में भेजा गया था।
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि इकाई आवश्यक रेट्रोफिट उत्सर्जन-नियंत्रण उपकरण किट या दोहरे ईंधन व्यवस्था और पर्याप्त स्टैक ऊंचाई के बिना 125-केवीए डीजल जनरेटर सेट का संचालन कर रही थी।
यह इकाई खतरनाक अपशिष्टों, जिनमें प्रयुक्त तेल भी शामिल है, के निपटान के लिए खतरनाक और अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन और सीमा पार आवागमन) नियम, 2016 के तहत अनिवार्य प्राधिकरण प्राप्त करने में भी विफल रही थी। कारखाने के प्रवेश द्वार पर खतरनाक अपशिष्ट प्रदर्शन बोर्ड और ईटीपी के लिए निर्धारित इनलेट फ्लो मीटर का अभाव था। उपचार प्रणाली के संचालन से संबंधित रिकॉर्ड भी नहीं रखे गए थे।
समिति ने भूजल दोहन की अनुमति न होने और पर्यावरण मंजूरी के तहत आवश्यक कई सुरक्षा उपायों के अभाव पर चिंता जताई। इनमें परिवेशी वायु निगरानी केंद्र, पर्याप्त हरित क्षेत्र, क्रोम पुनर्प्राप्ति संयंत्र, वर्षा जल संचयन प्रणाली और सौर वाष्पीकरण तालाब या विद्युत वाष्पीकरण यंत्र शामिल थे।
बोर्ड ने यूनिट को नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर यह बताने के लिए कहा है कि बिजली, पानी और अन्य सेवाओं पर प्रतिबंध और बंद करने के निर्देश क्यों नहीं लगाए जाने चाहिए। प्रस्तावित कार्रवाई में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति, वैधानिक दंड कार्यवाही और अभियोजन या अन्य कानूनी कार्रवाई भी शामिल है, जहां भी कानून के तहत इसकी अनुमति है।
इसके अलावा, जिला प्रशासन ने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है और उप-विभागीय मजिस्ट्रेटों (एसडीएम) और ब्लॉक विकास एवं पंचायत अधिकारियों (बीडीपीओ) को प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने और नियंत्रण उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, पंचायत भूमि पर कचरा फेंकने या जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बीडीपीओ को निर्देश दिए गए हैं, जबकि एसडीएम अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की नियमित रूप से समीक्षा करेंगे और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करेंगे।

