मत्स्य विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने गुरुवार को बिलासपुर स्थित मत्स्य निदेशालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में मछली के बीज का उत्पादन दोगुना होने वाला है। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से हिमाचल प्रदेश मछली के बीज उत्पादन में मजबूत, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनेगा।
चंदेल ने बताया कि ‘सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों और प्रौद्योगिकी के समावेश के माध्यम से राज्य में मछली के बीज उत्पादन को बढ़ावा देना’ शीर्षक से कार्यशाला का आयोजन हितधारकों को बीज उत्पादन के बारे में शिक्षित करने के लिए किया गया था। उन्होंने आगे बताया कि राज्य भर से क्षेत्रीय अधिकारियों, विशेष रूप से विभिन्न मछली फार्मों के प्रभारी अधिकारियों ने कार्यशाला में भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में मछली के बीज उत्पादन को अधिक प्रभावी, उच्च गुणवत्ता वाला और टिकाऊ बनाना था, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सके।
चंदेल ने कहा कि विभाग राज्य में मछली के अंडों का उत्पादन दोगुना करने के लिए एक ठोस रणनीति पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कार्प प्रजाति के अंडों का उत्पादन लगभग तीन मिलियन है, जबकि ट्राउट के अंडों का उत्पादन लगभग दो मिलियन है, जिसे आने वाले समय में दोगुना करने की योजना है। उन्होंने कहा, “इस कार्यशाला के माध्यम से अधिकारियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों का उपयोग करके इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है और नवीनतम तकनीकों को राज्य के सभी मछली फार्मों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।”

