पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को अतीत में हुई बेअदबी की घटनाओं को राज्य की सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के उद्देश्य से रची गई एक “गहरी साजिश” का हिस्सा बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम में अपवित्रता की घटनाओं से निपटने के प्रावधानों को शामिल करने से दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित होगी।
2008 के अधिनियम में संशोधन 13 अप्रैल को विधानसभा के विशेष सत्र में पारित किए गए, जिसमें ऐसे कृत्यों में संलिप्तता के लिए आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2015 से अब तक बेअदबी की 597 घटनाएं हुई हैं, जिनमें से केवल 44 मामलों में ही सजा हुई है। हाल के समय में बेअदबी का पहला मामला 2015 में बरगारी में हुआ था, जिसके बाद बेहबल कलां और कोटकापुरा में गोलीबारी की घटनाएं हुईं। उस समय राज्य में एसएडी-बीजेपी की सरकार थी।
बटाला के लिए 177 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की घोषणा करने के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए मान ने ये टिप्पणियां कीं। प्रमुख पहलों में नए पुलों का निर्माण और एक आधुनिक बस स्टैंड शामिल थे। उन्होंने इन परियोजनाओं को “अतीत से एक निर्णायक बदलाव” बताया और पूर्व की अकाली और कांग्रेस सरकारों पर राज्य को “लूटने” का आरोप लगाया।
मान ने एसएडी को भी निशाना बनाते हुए उसके नेताओं पर जनता की चिंताओं से कटे रहने और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने “नशीली दवाओं के नेटवर्क को संरक्षण दिया और राज्य संस्थाओं को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया”। इस कार्यक्रम में मौजूद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने लोगों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान किया।


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