September 7, 2026
Haryana

रोहतक स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुसार, बच्चों में मधुमेह और थायरॉइड के मामले बढ़ रहे हैं।

According to the Chancellor of Rohtak Health University, the cases of diabetes and thyroid in children are on the rise.

पंडित बी.डी. शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएसआर), रोहतक के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने रविवार को कहा कि जीवनशैली में बदलाव और खान-पान की अस्वस्थ आदतों के कारण बच्चों में मधुमेह, थायरॉइड, मोटापा और विकास संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति को नियंत्रण में रखने के लिए समय पर पहचान और उचित उपचार आवश्यक है।

बाल रोग विभाग द्वारा इंडियन सोसाइटी फॉर पीडियाट्रिक एंड एडोलसेंट एंडोक्रिनोलॉजी और आईएपी-रोहतक के सहयोग से आयोजित ‘पीडियाट्रिक एंडोक्राइन अपडेट 2026’ कार्यक्रम में अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर पीजीआईएमएस के डीन डॉ. अशोक चौहान भी उपस्थित थे। अग्रवाल ने कहा, “आजकल बच्चों में टाइप-1 मधुमेह, हाइपोथायरायडिज्म, मोटापा, बौनापन और समय से पहले या विलंबित यौवनारंभ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। फास्ट फूड, जंक फूड, मोबाइल फोन और टेलीविजन पर अत्यधिक समय बिताना और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।”

अग्रवाल ने आगे कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य ही देश का भविष्य है। “जीवन के शुरुआती दौर में ही हार्मोनल असंतुलन की पहचान करने से भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके लिए माता-पिता और बाल रोग विशेषज्ञों दोनों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है,” उन्होंने कहा। चौहान ने कहा, “पीजीआईएमएस गैर-संक्रामक रोगों पर शोध के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों में इन बीमारियों की रोकथाम के लिए साक्ष्य-आधारित उपचार और वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता है।”

कार्यक्रम की आयोजन सचिव और बाल रोग विशेषज्ञ अंजली वर्मा ने कहा कि बच्चे की लंबाई, वजन और विकास उसके स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। उन्होंने कहा, “हार्मोनल विकारों का अक्सर देर से पता चलता है। शुरुआती लक्षणों में उम्र के हिसाब से कम विकास, वजन में अचानक बदलाव, समय से पहले दाढ़ी-मूंछ का बढ़ना, यौवन में देरी और रक्त शर्करा में बार-बार उतार-चढ़ाव शामिल हैं। ऐसे मामलों में, किसी विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।”

अंजलि ने बताया कि इस कार्यक्रम में देश भर के जाने-माने विशेषज्ञों ने जन्मजात थायरॉइड की कमी, हार्मोनल आपात स्थितियों, टाइप-1 मधुमेह की देखभाल और यौवन से संबंधित मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। पैनल चर्चाओं में यौन विकास संबंधी विकारों जैसे जटिल विषयों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

आयोजन समिति के अध्यक्ष और बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. एन.डी. वासवानी ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य हार्मोन संबंधी विकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। डॉ. आलोक खन्ना, डॉ. कपिल भल्ला, डॉ. वंदना और डॉ. नेहा के साथ-साथ विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर, संकाय सदस्य और स्नातकोत्तर छात्र भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

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