July 23, 2026
Entertainment

मौजूदा राजनीतिक माहौल पर आदिल हुसैन की दो टूक, सिर्फ नेताओं को दोष देना सही नहीं, समाज भी उतना ही जिम्मेदार

Adil Hussain’s blunt take on the current political climate: it is not right to blame only politicians; society is equally responsible.

अपनी आगामी फिल्म ‘मैक्स, मिन और म्याउजाकी के प्रमोशन में जुटे अभिनेता आदिल हुसैन ने देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज जो हालात हैं, उसके लिए सिर्फ नेताओं को दोषी ठहराना सही नहीं होगा, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है।

आईएएनएस से बातचीत में आदिल हुसैन ने कहा कि राजनीति और समाज को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। राजनेता मंगल ग्रह से नहीं आए हैं। वे हमारे ही समाज की देन हैं। मैं भी इसी समाज का हिस्सा हूं और आप भी। इसलिए केवल नेताओं पर उंगली उठाना ठीक नहीं है। हालांकि उन्होंने जनता से वोट मांगकर जिम्मेदारी ली है, इसलिए उनकी जवाबदेही निश्चित रूप से ज्यादा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बाकी लोग अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएं।”

आदिल हुसैन ने कहा, “समाज को दिशा देने में कलाकारों और फिल्मकारों की भूमिका भी बेहद अहम होती है। फिल्मों, वेब कंटेंट और अन्य माध्यमों के जरिए हर दिन लाखों-करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं। ऐसे में मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों को भी यह समझना चाहिए कि उनके काम का समाज पर कितना गहरा असर पड़ता है।

आदिल हुसैन ने कहा, ”जिन लोगों के पास शक्ति, प्रभाव और संसाधन हैं, उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है। सबसे बड़ा सवाल यह होना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हम कैसी दुनिया और कैसा समाज छोड़कर जा रहे हैं। सिर्फ आर्थिक विकास से सब कुछ ठीक नहीं हो वाला। अगर अगली पीढ़ी मानसिक और शारीरिक परेशानियों से जूझ रही है तो उस आर्थिक विकास का क्या फायदा? आज अमेरिका जैसे विकसित देशों में बड़ी संख्या में लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं और मनोचिकित्सकों की मदद ले रहे हैं। इसलिए हमें यह भी सोचना होगा कि आखिर हम किस तरह का समाज तैयार कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, ”आज के समय में जरूरत इस बात की है कि लोग अपने परिवार, बच्चों और समाज के भविष्य के बारे में गंभीरता से सोचें। आत्मचिंतन के बिना किसी भी समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है।”

आदिल हुसैन ने राजनेताओं की शिक्षा और वैश्विक समझ पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, ”जो लोग देश का नेतृत्व करते हैं। उनका शिक्षित और जागरूक होना बेहद जरूरी है। नेताओं को यह समझ होनी चाहिए कि दुनिया में क्या बदलाव हो रहे हैं और समाज किन चुनौतियों का सामना कर रहा है, तभी वे सही दिशा में फैसले ले सकेंगे।”

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसका असर मुंबई, कोलकाता समेत कई अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। प्रदर्शन उस समय और तेज हो गए जब 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। वांगचुक 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। पुलिस का कहना था कि उनकी तबीयत बिगड़ने और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया।

सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

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