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एम्स नागपुर विकसित कर रहा बच्चों की गैर संक्रामक बीमारियों के उपचार का मॉडल: डॉ प्रशांत जोशी

AIIMS Nagpur is developing a model for treating non-communicable diseases in children: Dr. Prashant Joshi

पश्चिमी भारत के बड़े हिस्से में बच्चे गैर-संक्रामक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं और उन्हें बेहतर उपचार नहीं मिल पाता। लिहाजा, नागपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बीमारी से ग्रस्त बच्चों के उपचार का ऐसा मॉडल विकसित किया जा रहा है, जो पूरे देश में लागू किया जा सके।

एम्स नागपुर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. प्रशांत जोशी ने कहा कि बच्चों में होने वाली गैर-संचारी बीमारियों का इनक्यूबेशन पीरियड लंबा होता है और ये बचपन से ही शुरू हो जाती हैं, इसलिए शुरुआती पहचान, लगातार देखभाल और मजबूत पब्लिक हेल्थ सिस्टम की मांग करना जरूरी और अहम है। एम्स नागपुर देखभाल के ऐसे मॉडल विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्हें पूरे देश में लागू किया जा सके।

पश्चिमी भारत के बच्चों में होने वाली गैर-संचारी बीमारियों (एनसीडी) के संबंध में एम्स नागपुर में यूनिसेफ इंडिया, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पश्चिमी जोन) और एम्स नागपुर द्वारा आयोजित कार्यशाला में बच्चों में एनसीडी का पता कैसे लगाया जाता है और उनका इलाज और प्रबंधन कैसे होता है, इस पर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।

विशेषज्ञों ने बताया कि पश्चिमी और मध्य भारत के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में बच्चों में एनसीडी के मामले अक्सर जांच और विशेषज्ञ देखभाल की सीमित सुविधाओं के साथ सामने आते हैं, वहीं शहरी इलाकों में बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसी स्थितियां भी बढ़ रही हैं, जिसकी वजह सुस्त जीवनशैली, स्क्रीन टाइम और खान-पान में बदलाव हैं। चाहे ग्रामीण, आदिवासी या शहरी इलाके हों, बच्चों में होने वाली ये बीमारियां अक्सर तब तक पता नहीं चल पातीं जब तक कि समस्याएं गंभीर न हो जाएं।

इस मौके पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (वेस्टर्न जोन) की डायरेक्टर जनरल स्मिता वत्स शर्मा ने कहा, “पब्लिक हेल्थ रिपोर्टिंग से जागरूकता और लोगों की कार्रवाई तय होती है। पत्रकारों की यह अहम जिम्मेदारी है कि वे सबूतों पर आधारित जानकारी दें और ऐसी कहानियां सुनाएं, जिनसे नागरिकों को बच्चों पर असर डालने वाली नई स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने में मदद मिले।”

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