संभल, 4 मार्च। रमजान शुरू होने के बाद एक बार फिर से लाउडस्पीकर का मामला गरमा गया है। ऐसे में इस मामले को लेकर धर्मगुरु मुफ्ती आलम राजा नूरी का कहना है कि राज्य सरकार के आदेश के मुताबिक काम हो रहा है। इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, जो नमाज का टाइम है, इफ्तारी का समय है तो छत पर खड़े होकर नमाज पढ़ लेते हैं। उसमें कोई दिक्कत नहीं है। राज्य सरकार का आदेश है कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होना चाहिए। इसका अनुपालन किया जा रहा है।
मुफ्ती आलम राजा नूरी ने अपने एक बयान में कहा कि लाउडस्पीकर मामले में सभी मानकों का अनुपालन हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि परिसर के अंदर 55 डेसिबल की आवाज होनी चाहिए। उस पर अमल हो रहा है।
लाउडस्पीकर मामले पर सियासी घमासान को लेकर उन्होंने कहा कि यह बातें सियासी लोग जानें, इसका जवाब वही लोग दे सकते हैं। इससे हमारा क्या लेना-देना है। कानून और संविधान पर अमल करना भारत के हर नागरिक का कर्तव्य है। हिंदुस्तान में जितने भी समुदाय के लोग हैं, उनको इसका पालन करना अनिवार्य है। इस पर किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अपील करते हुए कहा कि धर्म से ऊपर इंसानियत है। लिहाजा इंसान अपने-अपने पर्व-त्योहार मनाएं, लेकिन इंसानियत का दामन न छोड़ें। होली, ईद और रमजान अपने-अपने त्योहार खुशी के साथ मनाएं। संविधान इसकी इजाजत देता है। धर्म पर भी चलें और इंसानियत का दामन न छोड़ें, तभी भारत विश्व गुरु बन सकता है।
रमजान को लेकर लाउडस्पीकर के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक कर कहा था कि चंद्र दर्शन के आधार पर मार्च से रमजान प्रारंभ हो रहा है। कई क्षेत्रों से धर्मस्थलों से अवैध लाउडस्पीकर बजाए जाने की शिकायत मिल रही है। इस पर तत्काल कार्रवाई करें। धर्मस्थल परिसर से बाहर लाउडस्पीकर की आवाज नहीं आनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो नोटिस दें, समन्वय से लाउडस्पीकर उतरवाएं और नियमानुसार कार्रवाई करें।