October 23, 2026
National

दिल्ली में सरकारी स्कूलों की किताबों की छपाई में घोटाले का आरोप, सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल

दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पर आम आदमी पार्टी ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मुफ्त वितरित की जाने वाली किताबों की छपाई में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि शिक्षा विभाग की ओर से छपवाई गई किताबों की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर में एनसीईआरटी की किताबों के मानकों का उल्लेख किया गया, लेकिन वास्तविक छपाई में घटिया गुणवत्ता के कागज का इस्तेमाल किया गया। भारद्वाज ने इस मामले में करीब 40 प्रतिशत कमीशनखोरी होने का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जवाब मांगा।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार आने के बाद कथित भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने दवाओं, साइकिलों, चावल और दिल्ली जल बोर्ड के टेंडर का उल्लेख करते हुए अब किताबों की छपाई में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराने की योजना में भी कथित तौर पर भ्रष्टाचार किया गया है। भारद्वाज ने कक्षा आठ की एनसीईआरटी की मल्हार पुस्तक दिखाते हुए दावा किया कि बाजार में उपलब्ध किताब और दिल्ली सरकार की ओर से छपवाई गई किताब की गुणवत्ता में काफी अंतर है।

उन्होंने बताया कि कक्षा एक से आठ तक की किताबों की छपाई के लिए जारी टेंडर की प्रतियां देखने पर कागज के आकार और गुणवत्ता से संबंधित शर्तें बाजार में उपलब्ध एनसीईआरटी की किताबों के समान दिखाई देती हैं। उन्होंने कहा कि टेंडर के अनुसार किताबों में ए-4 आकार के कागज और 80 जीएसएम की गुणवत्ता का उल्लेख था। उनके मुताबिक, निजी बुक स्टोर से खरीदी गई एनसीईआरटी की किताब इसी मानक के कागज पर छपी है, जबकि सरकार की ओर से छपवाई गई किताब में कथित तौर पर 60 से 65 जीएसएम का कागज इस्तेमाल किया गया है।

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सरकारी किताब का कागज पतला और धूसर रंग का है, जबकि बाजार में उपलब्ध किताब का कागज बेहतर गुणवत्ता वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे किताब की लागत और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई हैं। उनके अनुसार, कागज की गुणवत्ता और आकार के अंतर को देखते हुए दोनों किताबों की कीमत में कम से कम 40 प्रतिशत का अंतर हो सकता है।

आप नेता ने कक्षा आठ की किताब में छपाई के आकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किताब में अक्षर इतने छोटे हैं कि विद्यार्थियों को पढ़ने में परेशानी हो सकती है। उनके मुताबिक, बाजार में उपलब्ध किताब और सरकारी स्कूलों के लिए छपवाई गई किताब की तुलना करने पर दोनों के प्रिंट और कागज की गुणवत्ता में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी किताब के पहले पृष्ठ पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की तस्वीर छापी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि बच्चों को बेहतर गुणवत्ता की किताबें उपलब्ध कराने के बजाय घटिया कागज पर छपाई क्यों कराई गई और टेंडर की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि शिक्षा सत्र का आधा समय बीतने के बावजूद सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को किताबें वितरित नहीं की गई हैं। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था की गंभीर समस्या बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के बजाय निजी स्कूलों को बढ़ावा देने की है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में पिछले वर्ष भी निजी स्कूलों की फीस बढ़ाई गई थी और इस वर्ष भी फीस वृद्धि हुई है। भारद्वाज के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को समय पर किताबें और बेहतर सुविधाएं नहीं मिलने से अभिभावकों का निजी स्कूलों की ओर रुख बढ़ सकता है।

आप प्रदेश अध्यक्ष ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद से सवाल किया कि किताबों की छपाई में कथित 40 प्रतिशत कमीशन किसने लिया और इस प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी मामले में जवाब देने की मांग की।

भारद्वाज ने साइकिल खरीद में कथित कमीशनखोरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किताबों की छपाई में भी उसी तरह की अनियमितताएं होने का संदेह है। उन्होंने दिल्ली सरकार पर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामले में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

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