September 7, 2026
National

सत्य निकेतन हादसे पर बोले एम्बुलेंसकर्मी- घायलों को पहुंचाया जा रहा अस्पताल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Ambulance personnel spoke on the Satya Niketan accident – the injured are being taken to the hospital, rescue operation continues

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की बड़ी घटना सामने आई है। इस हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हैं। एम्स दिल्ली की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर (जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर) में 10 मरीजों को लाया गया, जिनमें से चार को मृत अवस्था में लाया गया था और बाद में एक गंभीर घायल की मौत हो गई। तीन मरीज अप्सताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। एक मरीज की सर्जरी की गई है, जबकि एक को मामूली चोट के बाद निगरानी के बाद छुट्टी दे दी गई है।

हादसे के बाद से ही मौके पर राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और जिला प्रशासन की टीमें आधुनिक कैमरों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं। मलबे में फंसे बच्चों और अन्य लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सिलेंडर अंदर भेजे गए हैं।

घटनास्थल पर मौजूद एम्बुलेंस ड्राइवरों ने बताया कि बचाव कार्य दोपहर से ही जारी है। एक ड्राइवर ने कहा, “हम यहां 2 बजे पहुंचे। अब तक हम एक घायल व्यक्ति को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जा चुके हैं, उसके दोनों पैरों में चोटें आई हैं। हमसे पहले पांच-छह एम्बुलेंस घायलों को अस्पताल ले जा चुकी थीं। भीड़ और ट्रैफिक की वजह से अस्पताल ले जाने में मुश्किल हुई, लेकिन हम उसे ले जाने में कामयाब रहे। उसके बचने की उम्मीद है।”

दूसरे ड्राइवर ने बताया, “मैंने अभी एक ही चक्कर लगाया है। करीब 3 बजे हम यहां से एक व्यक्ति को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले गए। दूसरी एम्बुलेंस भी घायलों को ले जा रही हैं। जिस मरीज को मैं ले गया, उसके पैरों में चोट थी, लेकिन हालत ऐसी थी कि वह बच जाएगा।” इस बीच एम्बुलेंस टीम की कर्मचारी ने बताया कि सबसे पहली कॉल उन्हें ही आई थी। उनकी एम्बुलेंस सफदरजंग अस्पताल में तैनात रहती है और कॉल उनके ऐप के जरिए आती है।

सफदरजंग अस्पताल में भर्ती घायल छात्र मोहम्मद अयान के पिता राजू वकील ने बताया, “मेरा बेटा 20 साल का है। वह पीजी के बगल में काम करता था। इमारत उसकी दुकान पर गिर गई, जिससे वह मलबे के नीचे दब गया। बच्चों ने हमें बताया कि आपका बेटा मलबे में फंसा है, आकर निकाल लीजिए।”

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने कहा, “यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हम दोपहर से ही हर चीज पर नजर रखे हुए हैं। हमारी सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है। हमारी पहली प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाना और यह सुनिश्चित करना है कि अस्पतालों में भर्ती लोगों का सही इलाज हो। एनडीआरएफ की टीम और दिल्ली सरकार के डॉक्टर मौके पर मौजूद हैं।”

वहीं, दूसरी तरफ सत्य निकेतन हादसे के विरोध में एबीवीपी के करीब 150-200 छात्र सिविक सेंटर पर जमा हो गए और प्रदर्शन किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य इमारत में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की, जिससे पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, करीब 15 छात्रों को हिरासत में लेकर कमला मार्केट थाने ले जाया गया, जबकि बाकी भीड़ को हटा दिया गया। इस दौरान सिविक सेंटर स्थित एमसीडी ऑफिस में तैनात एक सिक्योरिटी गार्ड भी घायल हो गया। गार्ड ने कहा कि हम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खड़े हैं, हम छात्रों के लिए ही खड़े हैं, लेकिन वे हमारे साथ हाथापाई कर रहे हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से बात कर, हालात का जायजा लिया और एम्स नई दिल्ली सहित केंद्र सरकार के सभी अस्पतालों को हर संभव चिकित्सा सहायता देने के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता स्वयं घटनास्थल पर पहुंचीं और रेस्क्यू की निगरानी की। उनके साथ मंत्री कपिल मिश्रा, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

विपक्ष इस घटना पर सरकार को घेर रहा है। कांग्रेस नेता अमृता धवन ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता यहां आईं और चली गईं। दिल्ली के लोगों को उनका इस तरह आना-जाना पसंद नहीं आया। सिर्फ हालात देखकर चले जाने से बच्चे बाहर नहीं निकलेंगे। उनकी जिम्मेदारी थी कि प्रशासन तेजी से काम करे। दोपहर में हुई घटना के कई घंटे बाद भी बच्चे मलबे में फंसे हैं।

कांग्रेस नेता मनोज चौहान ने कहा कि यह बहुत दुखद घटना है। दिल्ली यूनिवर्सिटी और अन्य यूनिवर्सिटीज में हॉस्टल की कमी है। यहां बहुत पुरानी इमारतें हैं जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है और न ही निगरानी होती है। यह सरकार की विफलता है।

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