हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा सड़कों और आवासीय क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में विवाद उत्पन्न हो गया है, जिसमें कुछ निवासियों ने अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान पक्षपात का आरोप लगाया है।
इस मुद्दे को आज जिला शिकायत समिति की बैठक में निवासी संजीव भोजराज ने उपायुक्त के समक्ष उठाया। उपायुक्त को दिए अपने ज्ञापन में भोजराज ने आरोप लगाया कि आवासीय क्षेत्रों में कई मकानों ने सड़क पर अतिक्रमण कर रखा है, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
उन्होंने मांग की कि अतिक्रमण विरोधी अभियान शहर के सभी आवासीय क्षेत्रों में एक समान तरीके से और बिना किसी भेदभाव के चलाया जाना चाहिए।
एनजीओ ‘मदद’ चलाने वाले भोजराज ने दावा किया कि सेक्टर 14, 15, अर्बन एस्टेट-2 के अलावा अन्य इलाकों में कई प्रभावशाली व्यक्तियों ने रैंप और चारदीवारी बनाकर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण किया है, लेकिन अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनमें से कुछ ने वाहनों की पार्किंग और अन्य उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक स्थान का उपयोग करने के लिए अपने घरों के सामने शेड बना लिए हैं और दीवारें खड़ी कर दी हैं। भोजराज ने आरोप लगाया कि ऐसा करने से उन्होंने सड़क को संकरा कर दिया है जिससे जनता को असुविधा हो रही है।
“क्या अतिक्रमण विरोधी अभियान केवल आम लोगों तक ही सीमित है? यह देखकर हैरानी होती है कि अधिकारी चुनिंदा तरीके से सरकार विरोधी अभियान चला रहे हैं,” उन्होंने आरोप लगाया। सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि अभियान के दौरान किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष टीम तैनात की जानी चाहिए।
भोजराज ने बताया कि उपायुक्त महेंद्र पाल ने उनकी याचिका पर ध्यान दिया क्योंकि उन्होंने उन्हें सार्वजनिक स्थान पर अतिक्रमण करने वाले मकानों की तस्वीरें भी उपलब्ध कराई थीं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने दावा किया, “डीसी ने हिसार स्थित एचएसवीपी एस्टेट ऑफिसर को इस मामले की जांच करने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।”
एचएसवीपी की एस्टेट ऑफिसर ज्योति मित्तल ने बार-बार फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं दिया।

