सोमवार को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान संत समाज के नेताओं के बीच अकाल तक़्त के पूर्व जत्थेदार की उपस्थिति चर्चा का केंद्र बनी रही। इससे उनके और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के बीच तनाव फिर से चर्चा में आ गया।
ज्ञानी रघुबीर सिंह को कुछ समय पहले स्वर्ण मंदिर के मुख्य पुजारी पद से अचानक हटा दिया गया था और इस कार्यवाही में उनकी भागीदारी ने राजनीतिक जगत में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की। उन्होंने एसएडी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के उस हालिया दावे की विशेष रूप से आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें पांच सिख पुजारियों द्वारा “षड्यंत्र” के तहत दंडित किया गया था। रघुबीर ने जवाब दिया कि सुखबीर ने अकाल तख्त के समक्ष अपनी गलतियों को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में मुक्तसर में एक रैली में अपने बयान से पलट गए।
ज्ञानी रघुबीर ने जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “यह विधेयक सिख समुदाय की सामूहिक इच्छा को दर्शाता है कि धर्म के अपमान के कृत्यों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए। लेकिन इसका क्रियान्वयन गंभीर, पारदर्शी और दुरुपयोग से मुक्त होना चाहिए।” उन्होंने समयबद्ध सुनवाई की अपील की।
आप के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा वाले, बाबा अमीर सिंह जवद्दी टकसाल, बाबा सतनाम सिंह (कार सेवा आनंदगढ़), बाबा अनहद राज सिंह लुधियाना और बाबा महिंदर सिंह सहित छब्बीस संत समाज नेता भी कार्यवाही में शामिल हुए।


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