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अयोध्या में पिछड़ा वर्ग आयोग की समीक्षा बैठक, सामाजिक-आर्थिक स्थिति का हुआ आकलन

Backward Classes Commission holds review meeting in Ayodhya; socio-economic status assessed.

उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की समीक्षा बैठक मंगलवार को अयोध्या में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष राम अवतार सिंह ने की, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ पिछड़े वर्गों की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के दौरान आयोग ने पिछड़े वर्गों के कल्याण और विकास को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए।

बैठक के बाद आईएएनएस से बातचीत में आयोग के अध्यक्ष राम अवतार सिंह ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था। आयोग इस बात का अध्ययन कर रहा है कि प्रदेश के किस क्षेत्र में कितना पिछड़ापन है, कौन-कौन सी जातियां पिछड़े वर्ग की श्रेणी में हैं और उनकी वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति क्या है। बैठक में पिछड़े वर्गों की आर्थिक स्थिति, शिक्षा के स्तर, सामाजिक स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों में उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों से यह भी जानकारी ली गई कि किन समुदायों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है और किन क्षेत्रों में विकास की अधिक आवश्यकता है। आयोग इन सभी तथ्यों को अपनी रिपोर्ट का हिस्सा बनाएगा।

जब उनसे पूछा गया कि पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा और पंचायत चुनावों के मद्देनजर क्या किसी रणनीति पर भी विचार किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग किसी प्रकार की चुनावी रणनीति तय नहीं करता। उन्होंने कहा कि रणनीति बनाना सरकार का अधिकार है, आयोग का कार्य केवल अध्ययन करना और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपना है। सरकार उस रिपोर्ट के आधार पर जो भी निर्णय उचित समझेगी, वही लागू किया जाएगा।

राम अवतार सिंह ने दोहराया कि बैठक का प्रमुख विषय केवल पिछड़ेपन का अध्ययन था। आयोग ने ओबीसी समुदाय के शैक्षणिक पिछड़ेपन, सामाजिक स्थिति, आर्थिक परिस्थितियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। बैठक के दौरान इस बात की भी समीक्षा की गई कि विभिन्न स्तरों पर उनका प्रतिनिधित्व पर्याप्त है या नहीं। आयोग का उद्देश्य तथ्यों के आधार पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करना है, ताकि सरकार पिछड़े वर्गों के उत्थान और कल्याण के लिए आवश्यक नीतिगत निर्णय ले सके।

आयोग ने इस प्रक्रिया में आम जनता से भी सुझाव देने की अपील की है, जिससे जमीनी स्तर की समस्याओं और आवश्यकताओं को रिपोर्ट में शामिल किया जा सके।

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