25 जुलाई । नीट क्वालिफाई करने वाली छात्राओं ने अपने पूरे सफर के बारे में बताया कि कैसे उन्होंने इस परीक्षा को उत्तीर्ण किया। छात्राओं ने बताया कि वो डॉक्टर बनकर समाज में मरीजों की सेवा करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि लोगों को स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो।
नीट क्वालिफाई करने वाली छात्रा लक्ष्मी बनारा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मैं एक गांव से हूं और मैंने नीट क्वालिफ़ाई किया है। मैं एक अच्छी डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहती हूं। गुजारा करने के लिए मैं और मेरा परिवार रोज सुबह खेतों में काम करते हैं। कॉलेज की छुट्टियों में जब मैं घर आती हूं, तो परिवार की मदद के लिए खेतों में काम भी करती हूं।
उन्होंने आगे कहा कि बायोलॉजी आसान थी, केमिस्ट्री ठीक-ठाक थी और फिजिक्स मुझे मुश्किल लगी, इसलिए फिजिक्स और केमिस्ट्री में मेरे नंबर कम आए। बायोलॉजी मेरा पसंदीदा विषय है। मेरा स्कोर उम्मीद से कम रहा। इसके बावजूद मैंने क्वालिफाई कर लिया है। मेरी रैंक लगभग नौ लाख है। अगर मुझे सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं भी मिलता है, तो भी मैं प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाई करके डॉक्टर बनूंगी।
छात्रा ने कहा कि मैं आगे चलकर मरीजों की सेवा करना चाहती हूं। इसके लिए अभी से ही मेहनत कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि मैं अच्छी डॉक्टर बनूं। मैंने जितनी मेहनत की थी, उतने ही मार्क्स मुझे मिले। अगर मैंने परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग की होती, तो मार्क्स अच्छे होते। मोबाइल से पढ़ाई करके मैंने परीक्षा की तैयारी की थी। यहां तक कि मैंने कोई सब्सिक्रप्शन भी नहीं लिया था। मुझे पूरा भरोसा है कि मैं आगे चलकर अपनी जिंदगी में जरूर कुछ बेहतर करूंगी।
छात्र मामा सुदाम हेम्ब्रम ने भी बताया कि किन-किन चुनौतियों का सामा करते हुए उन्होंने नीट जैसी मुश्किल परीक्षा में सफलता हासिल की। उनके मुताबिक, हम खेती-बाड़ी करके अपना गुजारा करते हैं। हम उसके रिजल्ट से बहुत खुश हैं और इस बात से भी कि वह डॉक्टर बनने के लिए क्वालिफाई कर गई है। मैं बहुत खुश हूं। हमारे गांव के सभी लड़के काफी प्रतिभाशाली हैं। मैं बहुत ही निर्धन पृष्ठभूमि से आता हूं।

