August 29, 2026
National

बंगाल 2026 चुनाव: जिला-वार पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति पर ईसीआई के फैसले के लिए संवेदनशीलता-मैपिंग

Bengal 2026 elections: Vulnerability-mapping for ECI’s decision on appointment of district-wise police observers

13 मार्च । इस साल के आखिर में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) जिलों की सेंसिटिविटी मैपिंग के आधार पर यह तय करेगा कि किस जिले में कितने पुलिस ऑब्जर्वर तैनात किए जाएं।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के दफ्तर के एक सूत्र ने बताया कि आयोग जिला-वार सेंसिटिविटी मैपिंग करते समय कुछ खास बातों को ध्यान में रख रहा है। इसके तहत जिलों को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा।

सूत्र के अनुसार, पहली श्रेणी में वे जिले शामिल होंगे जिनकी सीमा पड़ोसी देश बांग्लादेश से लगती है। दूसरी श्रेणी में वे जिले आएंगे जहां पिछले तीन चुनावों में, चाहे चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान या चुनाव के बाद, बड़े पैमाने पर चुनावी हिंसा की घटनाएं हुई हैं। तीसरी श्रेणी में वे जिले रखे जाएंगे जहां ये दोनों स्थितियां मौजूद हैं, यानी जिनकी सीमा बांग्लादेश से लगती है और जहां चुनावी हिंसा का इतिहास भी रहा है।

सूत्र ने बताया कि मुर्शिदाबाद, मालदा और कूच बिहार ऐसे जिलों के प्रमुख उदाहरण हैं जो तीसरी श्रेणी में आते हैं। इन जिलों की सीमा बांग्लादेश से लगती है और यहां पहले भी चुनाव से जुड़ी हिंसा की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वहीं कोलकाता से सटे हावड़ा जैसे जिले दूसरी श्रेणी के उदाहरण हैं। हावड़ा की सीमा बांग्लादेश से नहीं लगती, लेकिन यहां पहले गंभीर राजनीतिक हिंसा के मामले सामने आए हैं।

सूत्र के मुताबिक, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग इन इलाकों में केंद्रीय ऑब्जर्वरों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है, खासकर पुलिस ऑब्जर्वरों की तैनाती बढ़ाने पर।

2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 170 सामान्य पर्यवेक्षक, 84 व्यय पर्यवेक्षक और 37 पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के एक सूत्र ने बताया कि इस बार ईसीआई मुख्यालय ने पहले ही सूचित कर दिया था कि तीनों श्रेणियों के पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाई जाएगी, खासकर पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या में।

सूत्र के अनुसार, इस बार पश्चिम बंगाल में कम से कम 100 या उससे अधिक पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जो 2021 की संख्या का लगभग तीन गुना है।

सूत्र ने बताया कि इस बार पुलिस पर्यवेक्षकों को अधिक अधिकार दिए जाएंगे, विशेष रूप से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती और उनकी आवाजाही तय करने में। पहले जिला मजिस्ट्रेट, जो जिला निर्वाचन अधिकारी भी होते हैं सीएपीएफ की आवाजाही का निर्णय करते थे। लेकिन इस बार आयोग ने फैसला किया है कि संबंधित जिलों में सीएपीएफ की आवाजाही का निर्णय केवल ईसीआई द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षकों के अधिकार में होगा।

इसके अलावा, सीएपीएफ की तैनाती के लिए क्षेत्र-वार आवश्यकताओं का आकलन करने हेतु जिला-विशिष्ट मिश्रित टीमें गठित की जाएंगी। इन टीमों के सुझावों और पुलिस पर्यवेक्षकों के निर्णय को अंतिम माना जाएगा। इसी कारण इस बार पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या में काफी वृद्धि की गई है।

सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने यह भी पुष्टि की कि जिला-विशिष्ट टीमें क्षेत्र-वार सीएपीएफ आवश्यकताओं का आकलन करेंगी और पुलिस पर्यवेक्षकों के निर्णय ही अंतिम माने जाएंगे।

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