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दिल्ली में भाजपा सरकार के 10 महीने पूरे, ‘आप’ ने वादों को बताया जुमला

BJP government completes 10 months in Delhi, AAP calls promises mere rhetoric

दिल्ली में भाजपा सरकार के 10 महीने पूरे होने पर आम आदमी पार्टी ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। ‘आप’ के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज और पार्टी नेता कुलदीप कुमार ने सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले 10 महीनों में सरकार ने काम कम किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले किए गए बड़े-बड़े वादे अब तक पूरे नहीं हुए और जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने दिल्ली की महिलाओं को 2500 रुपए प्रतिमाह और मुफ्त गैस सिलेंडर देने का जो वादा किया था, वह पूरी तरह जुमला साबित हुआ है। नए साल की दहलीज पर खड़ी दिल्ली की महिलाएं आज भी इस मदद का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दीपावली और होली जैसे बड़े त्योहार भी बीत गए, लेकिन महिलाओं को न तो 2500 रुपए मिले और न ही मुफ्त सिलेंडर। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर निजी स्कूलों की फीस को लेकर झूठा दावा करने का आरोप लगाया।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि नए फीस रेगुलेशन कानून से स्कूलों की फीस कम हुई है, जबकि हकीकत यह है कि कई निजी स्कूलों ने 20 से 80 फीसदी तक फीस बढ़ा दी। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि वह एक भी ऐसे स्कूल का नाम बताएं, जहां फीस रोल बैक हुई हो। प्रदूषण के मुद्दे पर भी ‘आप’ ने सरकार को घेरा।

उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदूषण कम करने के बजाय आंकड़ों में हेरफेर किया। उन्होंने कहा कि एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर पानी का छिड़काव करवाया गया और जब प्रदूषण बढ़ा, तो कई जगह मॉनिटरिंग स्टेशन ही बंद कर दिए गए। यमुना की सफाई को लेकर भी सरकार पर “नकली यमुना” दिखाने का आरोप लगाया गया।

कुलदीप कुमार ने कहा कि सरकार का पहला साल दिल्लीवासियों के लिए वादा खिलाफी का साल रहा है। उन्होंने आयुष्मान कार्ड, स्कूल फीस माफी, गिग वर्कर्स के बीमा और रोजगार जैसे तमाम वादों को अधूरा बताया। कुलदीप कुमार ने दावा किया कि आयुष्मान कार्ड के तहत बड़े निजी अस्पतालों में इलाज का सरकारी दावा भी खोखला है। उन्होंने पिछली आम आदमी पार्टी सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने जो वादे किए, उन्हें जमीन पर उतारा, लेकिन मौजूदा सरकार के 10 महीनों में मोहल्ला क्लीनिक बंद हुए, अस्पतालों में दवाइयों की कमी रही और डीटीसी बसों की संख्या घट गई।

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