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भाजपा ने मतगणना को लेकर तृणमूल की याचिका खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया

BJP welcomes Supreme Court's decision to dismiss Trinamool's plea on vote counting

2 मई । पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें अदालत ने भारतीय चुनाव आयोग के उस निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत केंद्र सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक और सहायक के रूप में नियुक्त किया गया था।

यह मामला तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के उस सर्कुलर का पालन पूरी तरह और सही तरीके से किया जाना चाहिए, जिसमें राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का प्रावधान है।

इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए बंगाल भाजपा के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने करदाताओं के पैसे को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की फीस पर खर्च करके बर्बाद किया। कपिल सिब्बल राज्य की सत्ताधारी पार्टी की ओर से अदालत में पेश हुए थे।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “सत्ता में आने के बाद हम जनता के सामने राशि का खुलासा करेंगे। लोगों ने तृणमूल कांग्रेस को पहले ही नकार दिया है।”

केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने अदालत का रुख इसलिए किया, क्योंकि वह चाहती थी कि पश्चिम बंगाल में मतगणना की प्रक्रिया राज्य सरकार के उन कर्मचारियों द्वारा कराई जाए, जो उनके संगठन से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हालांकि, जब चुनाव आयोग ने यह फैसला किया कि वोटों की गिनती केंद्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा की जाएगी, तो तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध किया और इसे रोकने की कोशिश की। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट चले गए।”

मजूमदार ने सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “कल्याण बनर्जी को बार-बार सुप्रीम कोर्ट नहीं भेजा जाना चाहिए, क्योंकि वे ऐसे मामलों में लगातार हारते रहे हैं। इसके बजाय किसी अच्छे वकील को भेजा जाना चाहिए।”

भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष ने कहा, “जो जनता के सामने हार गया, वह और कहीं नहीं जीत सकता।”

हालांकि, राज्य मंत्री और तृणमूल उम्मीदवार शशि पांजा ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में भी चुनाव हुए हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे अन्य राज्यों में नहीं उठाए गए हैं।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है और अब हम इस पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। हमें इस फैसले का सम्मान करना है और इससे ज्यादा कुछ नहीं।”

तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला कोई बड़ा झटका नहीं है।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह सुप्रीम कोर्ट का एक सीधा-सा आदेश है। हमने मांग की थी कि मतगणना दलों में राज्य सरकार और केंद्र सरकार, दोनों के कर्मचारियों को शामिल किया जाए।”

इस बीच, चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा नायडू द्वारा दिए गए आश्वासन को दर्ज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कोई और निर्देश जारी किए बिना विशेष अनुमति याचिका का निपटारा कर दिया।

नायडू ने कहा कि 4 मई को वोटों की गिनती राज्य सरकार के प्रतिनिधि की मौजूदगी में होगी, जैसा कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में बताया गया है।

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