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मुंबई में पेड़ गिरने की घटनाओं के बीच बीएमसी का जागरूकता अभियान, नागरिकों ने उठाए सवाल

BMC awareness campaign amid tree felling incidents in Mumbai, questions raised by citizens

9 जुलाई । मुंबई में मानसून के दौरान पेड़ों के गिरने की बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश के बीच शहर में 1 जून से अब तक हजारों पेड़ों के गिरने की जानकारी सामने आई है, जिनमें पांच से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। इन घटनाओं के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने पेड़ों पर चेतावनी वाले पोस्टर लगाकर पेड़ सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू किया है।

बीएमसी की ओर से मानसून के दौरान संवेदनशील पेड़ों पर चेतावनी वाले पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इन पोस्टरों के माध्यम से लोगों को ऐसे पेड़ों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, जिनके गिरने की आशंका हो सकती है। हालांकि इस पहल को लेकर कुछ लोगों का मानना है कि केवल चेतावनी पोस्टर लगाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि पेड़ों की जड़ों को मजबूत करने और उनके संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।

मुंबई निवासी दीपा ने कहा कि पुराने समय से ही यह बात कही जाती रही है कि बारिश के मौसम में बड़े और पुराने पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है और लोगों को खुद भी सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने पेड़ों पर चेतावनी वाले पोस्टर लगाने की पहल पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर पेड़ पर इस तरह की चेतावनी लगाना संभव नहीं है और इससे समस्या का समाधान नहीं होगा।

दीपा ने कहा कि शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण और निर्माण कार्यों के कारण पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि जहां पेड़ों की जड़ें बाहर आ गई हैं या सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी हट गई है, वहां दोबारा मिट्टी डालकर जड़ों को मजबूत करने की जरूरत है।

एक अन्य महिला ने कहा कि पेड़ गिरने से हुई मौतें दुखद हैं, लेकिन इसके पीछे केवल पेड़ों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि कई मामलों में लापरवाही भी एक कारण हो सकती है। उन्होंने कहा कि सड़कों और फुटपाथों के कंक्रीटीकरण के कारण पेड़ों की जड़ें कमजोर हो रही हैं। ऐसे में पेड़ों को काटने के बजाय उनकी जड़ों को दोबारा मजबूत करने के उपाय किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि जैसे किसी दुर्घटना के बाद लोग पूरी तरह से यात्रा करना बंद नहीं कर देते। वैसे ही पेड़ों को लेकर भी संतुलित सोच की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सावधानी बरतना जरूरी है, लेकिन पेड़ों को काटना इसका समाधान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल उन टहनियों की छंटाई की जानी चाहिए जो खतरा पैदा कर रही हों।

महिला ने बिजली के तारों और अन्य हादसों का उदाहरण देते हुए कहा कि दुर्घटनाओं के कारण पूरी व्यवस्था को खत्म नहीं किया जाता, बल्कि उसमें सुधार किया जाता है। उन्होंने कहा कि पेड़ इंसानों को ऑक्सीजन देते हैं और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी हैं। इसलिए उनका संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने बीएमसी के जागरूकता अभियान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल पोस्टर लगाने से लोगों में जागरूकता नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि पहले यह समझना जरूरी है कि कौन सा पेड़ वास्तव में खतरनाक स्थिति में है और उसकी पहचान कैसे की जा रही है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से आकलन होना चाहिए, न कि केवल उन्हें काटने के लिए चिह्नित कर दिया जाए।

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