अनिल भारद्वाज
चंडीगढ़, 15 मार्च उन्होंने कहा कि अगर सुर्खियों से परे जाकर देखा जाए, जो अमेरिकी संसाधन प्रभुत्व की निरंतरता और डॉलर को विश्व की आरक्षित मुद्रा बनाए रखने की ओर इशारा करती हैं, तो एक स्पष्ट पैटर्न उभर कर सामने आएगा। तिवारी चंडीगढ़ में अपनी पुस्तक ‘ए वर्ल्ड एड्रिफ्ट’ के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रसिद्ध लेखक श्री खुशवंत सिंह के नेतृत्व वाले पंजाब लिट फाउंडेशन द्वारा किया गया था।
पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव से अपनी पुस्तक के बारे में बातचीत करते हुए तिवारी ने कहा, “विश्व में भारत का समय आएगा, लेकिन इसमें ढाई दशक और लगेंगे। भारत आगे बढ़ेगा, लेकिन सतर्क और चौकस रहना महत्वपूर्ण है। हमें ज़मीनी हकीकत को भांपना होगा और सावधानी से चलना होगा। हमें अपनी महानता के भ्रम को भी त्यागना होगा, क्योंकि ये केवल हमें ही भ्रमित करते हैं, किसी और को नहीं। हमें दशकों में अर्जित अपनी रणनीतिक शक्तियों को बनाए रखना होगा।”
मौजूदा संघर्ष में भारत की संभावित भूमिका के बारे में बात करते हुए तिवारी ने कहा, “जब आपके चारों ओर परिस्थितियाँ बदल रही हों, तो स्थिर रहना ही बेहतर होता है।”
पड़ोसियों के साथ भारत के संबंधों के बारे में बात करते हुए तिवारी ने कहा, “हमें और अधिक प्रयास करने होंगे, अन्यथा भारत के पड़ोसी चीन की ओर झुक जाएंगे, जो पहले से ही हो रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत को मालदीव, नेपाल और बांग्लादेश के साथ रचनात्मक रूप से अधिक बातचीत करने की आवश्यकता है।
नदी जल दावों के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस प्रश्न पर तिवारी ने कहा कि यह प्रश्न पड़ोसी देशों, विशेष रूप से चीन के साथ संबंधों के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, “जिस तरह से चीन ब्रह्मपुत्र पर विशाल बांध बना रहा है, उससे भारत का नदी तट अधिकार चीन के हाथों बंधक बन जाएगा। हम पाकिस्तान पर जल को लेकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हमारे साथ भी ऐसा ही हो सकता है।”
तिवारी ने आगे कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लगातार तनाव का कारण बना हुआ है। “चीन ने अपने पड़ोसियों के साथ अधिकांश भूमि विवाद सुलझा लिए हैं, लेकिन भारत के साथ उन्हें सुलझाने का विकल्प नहीं चुना है। इसका कारण यह है कि चीन और भारत दक्षिण एशिया की दो उभरती हुई शक्तियां हैं और हम पर दबाव बनाए रखना चीन के हित में है।” उन्होंने बताया कि मुद्दा नियंत्रण रेखा का नहीं, बल्कि तिब्बत का है। उन्होंने कहा कि चीन ने “अवैध रूप से तिब्बत पर कब्जा कर रखा है और यद्यपि हम ‘एक चीन’ नीति का समर्थन करते हैं, फिर भी हम दलाई लामा की मेजबानी करते हैं। वास्तविक राजनीति में यह हमारी एक अच्छी चाल है।”
रूस के साथ भारत के संबंधों पर बोलते हुए तिवारी ने कहा कि तत्कालीन सोवियत संघ के साथ हमारे रक्षा व्यापार संबंध समाजवाद में साझा विश्वास और वैचारिक अनुकूलता से पूरित थे। “लेकिन अब रक्षा के क्षेत्र में केवल एक नीरस संबंध ही रह गया है। हमारे आर्थिक संबंध यूरोप और अमेरिका की ओर झुक गए हैं, जिससे हम एक ऐसे विरोधाभासी, अपंग और खाई को पाटने में असमर्थ हैं,” तिवारी ने कहा।
इस अवसर पर बोलते हुए खुशवंत सिंह ने पंजाब लिट फाउंडेशन के प्रमुख कार्यक्रमों – पीपल्स वॉक अगेंस्ट ड्रग्स और मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स – का परिचय दिया और इन कार्यक्रमों के लिए समर्थन मांगा।

