छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) दोनों मामलों में कवासी लखमा को जमानत दी गई है। हालांकि, जमानत के लिए बेल बॉन्ड निचली अदालत तय करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कवासी लखमा अंतरिम जमानत के दौरान छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे। आदेश में कोर्ट ने कहा, “लखमा छत्तीसगढ़ में तब तक प्रवेश नहीं करेंगे, जब तक कि उन्हें कोर्ट में पेश न होना हो। वे कोर्ट की सुनवाई से एक दिन पहले राज्य में आ सकते हैं।”
आदेश के अनुसार, कवासी लखमा को स्वास्थ्य कारणों को छोड़कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, वह विदेश यात्रा नहीं करेंगे और पासपोर्ट स्पेशल जज की कोर्ट में जमा करना होगा। कवासी लखमा को अपना फोन नंबर ईडी अधिकारी को देना होगा और इस नंबर को ट्रायल कोर्ट को बताए बिना बदला नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच में काफी समय लगने की संभावना है और जल्दबाजी में ट्रायल का प्रॉसिक्यूशन केस पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए जांच पूरी करने के लिए पूरी छूट दी जानी चाहिए।
कवासी लखमा के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह एक आदिवासी हैं और 6 बार विधायक रह चुके हैं। लखमा के वकील के अनुसार, इस मामले में घूस लेने का आरोप है, लेकिन कोई भी बरामदगी नहीं हुई है। कवासी लखमा की उम्र 67 साल हो चुकी है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए।
राज्य सरकार और ईडी की ओर से लखमा की जमानत का विरोध किया गया। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि मामले की जांच अभी जारी है और इसमें मंत्रियों, राजनीतिक पदाधिकारियों व वरिष्ठ अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आई है। इस कथित घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।
दरअसल, 15 जनवरी 2025 को ईडी और 2 अप्रैल 2025 को ईओडब्ल्यू ने लखमा को गिरफ्तार किया था। इस मामले में कई चार्जशीट फाइल की जा चुकी हैं और जांच पूरी हो चुकी है। इस केस में 1193 गवाह बनाए गए हैं। कुल 52 आरोपी हैं, जिनमें से 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पहले ही 19 लोगों को जमानत मिल चुकी है।


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