मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को कहा कि राज्य भर में उन्नत चिकित्सा प्रक्रियाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चामियाना और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है, जो राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने आगे कहा, “2026 की शुरुआत तक राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा का विस्तार करने की योजना है।”
उन्होंने कहा, “विशेष चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए, पांच प्रमुख चिकित्सा संस्थानों – आईजीएमसी-शिमला, टांडा स्थित मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर और नेर चौक स्थित मेडिकल कॉलेज, और चामियान स्थित सुपरस्पेशलिटी अस्पताल – को अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (बीएमटी) के लिए समर्पित बुनियादी ढांचे हेतु 5 करोड़ रुपये प्रत्येक आवंटित किए गए हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस पहल के पूरक के रूप में आईजीएमसी और टांडा में एआई-सुसज्जित स्मार्ट लैब के लिए 75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिससे स्वचालन के माध्यम से निदान के लिए प्रतीक्षा समय में काफी कमी आएगी।
सुखु ने कहा कि युवा पीढ़ी की विशेष जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने एआईएसएसएस-चामियाना में एक उन्नत बाल चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है, ताकि राज्य में विश्व स्तरीय बाल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि इस प्रयास का उद्देश्य पारंपरिक बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर अत्याधुनिक तकनीक और विशेष रोगी देखभाल को अपनाना है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों के सुदूर कोनों से लेकर शहरी केंद्रों तक, प्रत्येक नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाला उपचार मिले। मुख्यमंत्री सुखु ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे 202 व्यक्तियों को नौकरियां प्रदान की हैं।
शिक्षा विभाग में कुल 127 व्यक्तियों को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के संयुक्त प्रशासनिक अधिकारी (आईटी) और बहु-कार्यकारी कर्मचारियों के रूप में नियुक्तियाँ दी गईं। इसके अतिरिक्त, गृह विभाग में 74 व्यक्तियों (70 संयुक्त प्रशासनिक अधिकारी (आईटी) के रूप में, चार चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी) और अभियोजन विभाग में एक व्यक्ति की नियुक्ति की गई।
इसे नव वर्ष का उपहार बताते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के शासनकाल में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि अनुकंपा के आधार पर रोजगार चाहने वाले परिवारों के जायज दावों को अनदेखा किया गया, जिससे कई लोग लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति में रहे। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार अनुकंपा के आधार पर योग्य उम्मीदवारों को नियुक्तियां प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि उन्हें एक सुरक्षित जीवन मिल सके।


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