गुरुग्राम में बुनियादी ढांचा परियोजनाएं वर्षों से अटकी पड़ी हैं, जिनमें से कई एक दशक से अधिक समय से बार-बार निर्धारित समय सीमा को पार कर रही हैं, जिसके कारण मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने प्रत्येक लंबित परियोजना पर स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
यह कदम नगर निगम और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई बैठक के बाद उठाया गया है, जिसमें लंबे समय से हो रही देरी का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया। अधिकारियों ने मुख्य रूप से तकनीकी समस्याओं, निविदा प्रक्रिया और बजट संबंधी बाधाओं का हवाला दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अब परियोजनावार स्थिति रिपोर्ट मांगी है, और अधिकारियों ने संकेत दिया है कि किन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा और पूरा किया जाएगा, इस पर निर्णय एक महीने के भीतर होने की उम्मीद है।
सिविल अस्पताल सबसे लंबे समय से लंबित परियोजनाओं की सूची में सबसे ऊपर है। यह परियोजना एक दशक से अधिक समय से अधूरी पड़ी है, पुराने सिविल लाइंस अस्पताल को 2021 में ध्वस्त कर दिया गया था। कई एजेंसियों के हाथों से गुजरने के बाद, अब यह हरियाणा राज्य औद्योगिक और अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के पास है, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
13 वर्षों से लंबित नया बस टर्मिनल भी साकार नहीं हो पाया है। 2015 में घोषित स्मार्ट ग्रिड परियोजना, जिसका लक्ष्य 2017 तक 24 घंटे बिजली आपूर्ति और भूमिगत केबलिंग प्रदान करना था, अभी भी अधूरी है। लगभग एक दशक पहले 4,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से घोषित धौला कुआं से मानेसर तक प्रस्तावित पॉड-टैक्सी कॉरिडोर पर अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है। अप्रैल में ही सरकार सुजुकी और ग्लाइडवेज़ के साथ इसकी व्यवहार्यता पर चर्चा कर रही थी। इसी तरह सेक्टर 52 में प्रस्तावित मनोरंजन क्षेत्र में भी 10 वर्षों से अधिक समय से कोई खास प्रगति नहीं हुई है।
गुरुग्राम की रेल कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भी देरी हुई है। मेट्रो का पहला चरण, जिसे शुरू होने में 14 साल लगे, अब सेक्टर 9 तक निर्माणाधीन है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सेक्टर 9-साइबर सिटी खंड के लिए 1,662 करोड़ रुपये की निविदा 18 नवंबर को बंद हो रही है। वहीं, दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली कॉरिडोर का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
अपशिष्ट प्रबंधन एक और बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। बंधवारी लैंडफिल बार-बार निर्धारित समय सीमा में कचरा निपटाने में विफल रहा है। पुराने कचरे के निपटान के लिए नियुक्त दो फर्मों को 2025 में लक्ष्य का केवल 16.5% ही संसाधित करने के बाद बर्खास्त कर दिया गया और उन पर 9.02 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। नगर निगम ने अब फरवरी 2027 की समय सीमा निर्धारित की है। 2017 के समझौते के तहत 2019 में शुरू होने वाला अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र भी अभी तक चालू नहीं हो पाया है।
जल निकासी परियोजनाओं का भी यही हाल है। लेग-4 मास्टर ड्रेन पर काम 2022 में शुरू हुआ था, जबकि सेक्टर 68 से 75 में 51 करोड़ रुपये की लागत से बन रही नालियों का नेटवर्क इस साल मई से अगस्त के बीच तय समय सीमा के बावजूद अधूरा पड़ा है। निवासियों के समूहों का यह भी आरोप है कि चार वर्षों में लगभग 100 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद 2023 से बरसाती नालियों की सफाई नहीं की गई है।
यूनाइटेड गुरुग्राम आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष प्रवीण यादव ने कहा कि लंबे समय से चल रही देरी ने गुरुग्राम की “मिलेनियम सिटी” की छवि और इसके बुनियादी ढांचे के बीच के अंतर को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि वादा की गई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री को एक या दो साल के लिए गुरुग्राम का सीधा प्रभार लेना चाहिए।

