June 25, 2026
National

दार्शनिक आचार्य अभिनव गुप्त जयंती पर आस्था का संगम, भैरव गुफा में जुटे श्रद्धालु और धर्मगुरु

Confluence of faith on the birth anniversary of philosopher Acharya Abhinav Gupta, devotees and religious leaders gathered in Bhairav ​​cave.

25 जून । कश्मीर के बडगाम जिले के बीरवाह में कश्मीरी पंडित, श्रद्धालुओं और धर्मगुरु सैयद अब्दुल लतीफ ने पवित्र और ऐतिहासिक भैरव गुफा में दार्शनिक आचार्य अभिनव गुप्त की जयंती पर प्रार्थना और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कश्मीर शैववाद और आध्यात्मिक चिंतन पर उनके स्थायी प्रभाव को रेखांकित किया गया।

दार्शनिक अभिनव गुप्त की जयंती पर गुरुवार को भैरव गुफा, बीरवाह पहुंचे कुछ लोगों ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि अभिनव गुप्त की जयंती पर भैरव गुफा में आना एक बहुत ही अच्छा और रूहानी एहसास है। उन्होंने बताया कि आज मैं यहां माथा टेकने के लिए आया था, लेकिन यहां पहुंचकर देखा कि आने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। नौजवान के साथ-साथ बूढ़े-बुजुर्ग भी आज यहां दार्शनिक अभिनव गुप्त की जयंती पर पहुंचे हैं।

एक दूसरी श्रद्धालु ने बताया कि जिस गुफा में अभिनव गुप्त जी ने ध्यान लगाया था, वहां आकर मुझे भी उस ऊर्जा का अहसास हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिस रास्ते से वो यहां आए थे, आज मैंने भी उन्हीं रास्तों से हजारों वर्षों बाद यहां आकर माथा टेका और प्रार्थना की। यह अहसास बहुत अच्छा है। उन्होंने कहा कि अभिनव गुप्त जी की जयंती पर इस गुफा में आकर माथा टेकना मेरे साथ-साथ पूरे कश्मीर के लिए एक आशीर्वाद है।

भैरव गुफा पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि यहां आकर बहुत खुशी हो रही है। काफी अच्छी व्यवस्था है यहां। उन्होंने कहा कि यहां किसी प्रकार का कोई डर नहीं है। हमें अब यहां 90 से ज्यादा इज्जत मिलती है। इसी के साथ, उन्होंने लोगों से अपील की कि वे यहां जरूर से आएं।

वहीं, गुफा पहुंचे धर्मगुरु सैयद अब्दुल लतीफ ने कहा कि “हमें सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्म, जाति, और उसूल के लोगों को आपस में एक साथ प्यार से रहना चाहिए और कम्युनल हार्मनी को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम का मकसद है कि इंसानी भाईचारा को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि हम में से बेहतर वह है, जो लोगों को फायदा पहुंचाए।

उन्होंने कहा कि मानव जाति के लिए मुसलमान को एक फायदेमंद वजूद बनना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हमारी जो पंडित बिरादरी है, मैं चाहता हूं कि वो जल्द से जल्द कश्मीर लौटे ताकि हमारी जो तहजीब है, उसकी तकरीर हो।

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