July 22, 2026
National

कांग्रेस सांसदों ने सरकार पर कसा तंज, कहा-‘आंदोलन को बलपूर्वक दबाने में जुटी सरकार’

Congress MPs took a dig at the government, stating that it is bent on suppressing the agitation by force.

छात्रों से जुड़े मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी क्रम में विपक्षी दलों के सांसदों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग करने और संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लंबे भाषण देने के बजाय तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। विपक्ष को मंत्री का स्पष्टीकरण नहीं बल्कि उनका इस्तीफा चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि जब विपक्ष किसी महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाता है तो सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह उस पर चर्चा करे। सरकार संवाद करने के बजाय शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रही है।

कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक दलों की लड़ाई से ऊपर बताते हुए कहा कि यह देश के भविष्य और छात्रों को न्याय दिलाने की लड़ाई है। देश का युवा देख रहा है कि इस मुद्दे पर कौन उनके साथ खड़ा है और कौन उनके रास्ते में बाधा बन रहा है।

कांग्रेस सांसद जोथिमानि ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है तथा प्रदर्शन कर रहे छात्रों और विपक्षी नेताओं के साथ बर्बरता की गई। उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशन बंद किए गए, संसद की कार्यवाही स्थगित की गई लेकिन जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने बताया कि विपक्षी नेताओं ने एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की थी। इसके बावजूद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। टैगोर ने कहा कि राहुल गांधी घायल छात्रों से अस्पताल मिलने गए और बाद में सभी सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। प्रधानमंत्री विपक्ष के नेता से मिलने को तैयार नहीं थे जिसके बाद शांतिपूर्ण धरना दिया गया।

समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष संसद में यह मुद्दा उठाने की कोशिश करता है तो उसी पर आरोप लगाए जाते हैं। भाजपा स्वयं भी सदन की कार्यवाही बाधित कर रही है। सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सभी पक्षों को साथ लेकर चलने की होती है। यदि सरकार संवाद का रास्ता नहीं अपनाती तो तनाव की स्थिति पैदा होना स्वाभाविक है।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने छात्रों पर बल प्रयोग को शर्मनाक बताते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार से छात्रों के साथ खुले मन से बातचीत करने की अपील की। इस बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा में सांसदों की बैठने की व्यवस्था और कथित संबद्धता के आधार पर जारी किए गए बुलेटिन को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सावंत के अनुसार अदालत ने यह सवाल उठाया कि एक संयुक्त सचिव किस कानूनी आधार पर किसी पार्टी की संबद्धता या विलय से संबंधित निर्णय ले सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है और इसके बाद अंतिम सुनवाई निर्धारित की है।

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