N1Live National यूसीसी और भोजशाला विवाद जैसे मुद्दों को वोट-बैंक की नजर से देखती है कांग्रेस : सीएम मोहन यादव
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यूसीसी और भोजशाला विवाद जैसे मुद्दों को वोट-बैंक की नजर से देखती है कांग्रेस : सीएम मोहन यादव

Congress views issues like the UCC and the Bhojshala dispute through the lens of vote-bank politics: CM Mohan Yadav

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। राज्य सरकार की हाई-लेवल कमेटी द्वारा इस मुद्दे पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने के एक दिन बाद, उन्होंने विपक्षी पार्टी से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए यादव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस यूसीसी और भोजशाला विवाद जैसे मुद्दों को हिंदू-मुस्लिम राजनीति और वोट-बैंक की नजर से देखती है।

सीएम ने कहा कि समिति ने मुझे यूसीसी की रिपोर्ट सौंप दी है। अब कांग्रेस को भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करना चाहिए। चाहे यूसीसी हो या भोजशाला का मुद्दा, कांग्रेस हर मामले को सिर्फ हिंदू-मुस्लिम राजनीति और वोट-बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है। उन्होंने कहा कि समिति की सलाह-मशविरे की प्रक्रिया में लोगों की बड़ी भागीदारी दिखी, जिसमें अलग-अलग धर्मों के लोगों ने प्रस्तावित कानून पर अपनी राय रखी।

यादव ने कहा कि यह एक अच्छी बात है कि सभी धर्मों के लोगों ने यूनिफॉर्म सिविल कोड पर खुलकर और साफ-साफ अपनी राय रखी। हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है। मुख्यमंत्री का यह बयान हाई-लेवल कमेटी द्वारा उन्हें अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के एक दिन बाद आया है।

इस समिति का गठन मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की संभावनाओं की जांच करने और कानूनी ढांचा सुझाने के लिए किया था।

समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने की।

इसके सदस्यों में प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठनकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया शामिल हैं।

राज्य सरकार के अनुसार, रिपोर्ट तीन वॉल्यूम में तैयार की गई है। पहले वॉल्यूम में संवैधानिक प्रावधानों, अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीकों, केंद्र और राज्य के कानूनों और मौजूदा रीति-रिवाजों की जांच के बाद समिति की सिफारिशें शामिल हैं।

दूसरे वॉल्यूम में मध्य प्रदेश के लिए तैयार यूसीसी बिल का ड्राफ्ट है। प्रस्तावित कानून में चार हिस्से, 404 सेक्शन और सात शेड्यूल हैं।

तीसरे वॉल्यूम में समिति द्वारा जिला और राज्य स्तर पर बातचीत और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए किए गए व्यापक जन-परामर्श का विवरण है।

9.58 लाख से ज्यादा सुझाव मिले और उनका विश्लेषण सवालों, लिंग और समुदायों के आधार पर किया गया।

पैनल की मुख्य सिफारिशों में से एक यह है कि अनुसूचित जनजातियों को प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड के दायरे से बाहर रखा जाए, क्योंकि आदिवासी समुदायों को संवैधानिक सुरक्षा मिली हुई है और उनकी अपनी अलग रीति-रिवाज हैं।

रिपोर्ट का सौंपा जाना मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने की भाजपा सरकार की कोशिश में एक अहम पड़ाव है। उम्मीद है कि राज्य सरकार विधानसभा में बिल पेश करने की दिशा में अगला कदम उठाने से पहले सुझावों और कानून के ड्राफ्ट की समीक्षा करेगी।

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