चंबा जिला मुख्यालय और पवित्र शहर भरमौर बाढ़ और भूस्खलन से हुए व्यापक नुकसान के बाद लगातार चौथे दिन भी सड़क मार्ग से सभी ओर से कटे रहे।
पठानकोट और धर्मशाला से होकर जाने वाले दो प्रमुख मार्ग अवरुद्ध हैं, जबकि साछ दर्रा पहले ही बंद हो चुका है। सुदूर पांगी घाटी भी देश के बाकी हिस्सों से कट गई है। इस हफ़्ते की शुरुआत में मणि महेश नाले में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ के कारण मणि महेश यात्रा बुरी तरह बाधित हुई है, जिससे तीर्थयात्रा मार्ग पर सड़कें और पुल बह गए हैं। चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग के कई जगहों पर बह जाने से हज़ारों श्रद्धालु फंस गए हैं।
ज़िले के अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार तक 280 बच्चों समेत 3,000 से ज़्यादा तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को बचा लिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “स्थिति गंभीर है क्योंकि राजमार्ग के कई हिस्से रावी नदी में पूरी तरह से गायब हो गए हैं। कई जगहों पर तो सड़क का नामोनिशान ही नहीं बचा है।” चंबा और भरमौर में चार दिनों से संचार सेवाएँ भी ठप हैं। चंबा में एयरटेल की मोबाइल कॉल सेवाएँ आंशिक रूप से बहाल कर दी गई हैं, लेकिन इंटरनेट सेवाएँ अभी भी बंद हैं।
पैदल ही बनीखेत पहुंचने में कामयाब रहे तीर्थयात्रियों ने भूस्खलन प्रभावित इलाके से लगभग 80 किलोमीटर पैदल चलने के कष्टदायक अनुभव सुनाए।
गुरदासपुर के कुछ तीर्थयात्रियों ने कहा कि प्रशासन और सरकार ने कोई मदद नहीं की, और स्थानीय लोगों के प्रयासों की वजह से ही वे जीवित बचे हैं। उन्होंने बताया कि तबाह हुए रास्तों पर एक जेसीबी भी दिखाई नहीं दे रही थी। चंबा से आगे सड़क के कुछ हिस्सों को एकतरफ़ा यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है, लेकिन अधिकारियों ने माना कि हालात अभी भी नाज़ुक हैं। भरमौर से आगे यात्रा मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है, जिससे अभी भी फंसे हुए लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे कुछ बुज़ुर्ग तीर्थयात्रियों को हवाई मार्ग से सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया।