July 6, 2026
Entertainment

‘लॉक अप 2’ में माधुरी जैन ग्रोवर के बयान पर विवाद, तीसरे बच्चे और अमीरी-गरीबी वाली टिप्पणी से मचा बवाल

Controversy over Madhuri Jain Grover’s statement on ‘Lock Upp 2’; remarks regarding a third child and the rich-poor divide spark an uproar.

रियलिटी शो ‘लॉकअप’ सीजन 2 अक्सर अपने कंटेस्टेंट्स की निजी बातों और तीखे बयानों को लेकर चर्चा में रहता है। शो का फॉर्मेट ही ऐसा है कि यहां कंटेस्टेंट्स अपनी जिंदगी से जुड़े ऐसे खुलासे करते हैं जो कई बार दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं और कई बार विवाद भी खड़ा कर देते हैं। इसी कड़ी में इस बार बिजनेसमैन अशनीर ग्रोवर की पत्नी और कंटेस्टेंट माधुरी जैन ग्रोवर का एक बयान सामने आया है, जिस पर लोग अब अलग-अलग राय दे रहे हैं।

हाल ही के एक एपिसोड में माधुरी जैन ग्रोवर ने बताया कि वह और उनके पति अशनीर ग्रोवर तीसरा बच्चा चाहते थे लेकिन उनके परिवारों ने इस फैसले का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि परिवार की सहमति न मिलने के कारण उन्होंने यह प्लान छोड़ दिया।

हालांकि असली विवाद उनके इस निजी खुलासे से ज्यादा उनके आगे दिए गए विचारों को लेकर शुरू हुआ। शो में उन्हें यह कहते हुए सुना गया- ”तीसरा बच्चा इंसान को ज्यादा जवान रखता है। अगर आप देखें तो शाहरुख खान जैसे कई अमीर लोगों के भी तीन बच्चे हैं। ‘हम दो हमारे दो’ का कॉन्सेप्ट हर किसी पर लागू नहीं होता। जितने अमीर लोग ज्यादा बच्चे पैदा करेंगे, उतनी अमीरी बढ़ेगी और जितने गरीब लोग ज्यादा बच्चे पैदा करेंगे, उतनी गरीबी बढ़ेगी।”

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इसे गलत सोच और समाज को बांटने वाला बयान बताया। एक यूजर ने लिखा, ‘यह बयान दिखाता है कि कुछ लोगों को यह समझ नहीं है कि इकॉनोमी कैसे काम करती है या डेमोग्राफी कैसे होती है। इससे बहुत कुछ पता चलता है कि एलीट क्लास के पास जरूरी जानकारी की कमी है। आम जनता ऐसे लोगों को वोट देती है।’

दूसरे यूजर ने लिखा, ‘अगर समाज में सिर्फ अमीर लोग ही बच्चे पैदा करें और गरीब लोग न करें, तो उनके पास लेबर नहीं होगी। अमीर अपने बच्चों को आर्म्ड फोर्स में नहीं भेजते, अमीर टेररिज्म/बॉर्डर/सिक्योरिटी से कैसे निपटेंगे? अमीरों को अमीर बने रहने के लिए लेबर की जरूरत होती है।’

एक अन्य प्रतिक्रिया में यूजर्स ने इसे ‘एलीट सोच’ का उदाहरण बताया और कहा, ”इस तरह के विचार समाज में गलत संदेश देते हैं। हर व्यक्ति को परिवार बढ़ाने का अधिकार है और इसे आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखना ठीक नहीं है।”

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