4 मई । तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती सोमवार को सुबह 8 बजे शुरू हुई। हालांकि, इस बार तमिलनाडु के चुनावों नतीजों का पहले अनुमान लगाना पिछले कुछ दशकों में सबसे मुश्किल रहा है।
तमिलनाडु में इस बार नए राजनीतिक दलों के उभरने, स्थापित नेताओं के बीच आंतरिक मतभेद और मतदाता सूची के बड़े पैमाने पर पुनरीक्षण के असर ने चुनावी मुकाबले को बेहद जटिल बनाया। ऐसे में अनुभवी राजनीतिक विश्लेषक भी नतीजों को लेकर स्पष्ट अनुमान लगाने में हिचकिचा रहे हैं।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके पार्टी के लिए ये चुनाव महत्व रखते हैं। अगर पार्टी जीत हासिल करती है, तो यह 1971 के बाद पहली बार होगा जब पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में आएगी, यानी 55 साल का अंतर खत्म होगा, और उनकी कल्याणकारी नीतियों की मजबूती साबित होगी।
विपक्षी गठबंधन, जिसका नेतृत्व ‘ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ (एआईएडीएमके) कर रही है, भी एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर यह गठबंधन सत्ता में आता है, तो पार्टी के कद्दावर नेता जे. जयललिता के निधन के बाद यह उसकी पहली विधानसभा जीत होगी।
इसके साथ ही, एडप्पादी के. पलानीस्वामी एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। ऐसा होने पर वे उन चुनिंदा नेताओं की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने एक से ज़्यादा बार मुख्यमंत्री का पद संभाला है।
इस चुनावी मुकाबले में एक नया पहलू अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय और उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कड़गम’ (टीवीके) के रूप में सामने आया है। इस नई पार्टी की जीत एक ऐतिहासिक राजनीतिक उलटफेर साबित होगी; इसकी तुलना एमजी रामचंद्रन के उदय से की जा सकती है।
वहीं, सीमान की पार्टी ‘नाम तमिलर काची’ (एनटीके), भले ही उसे सत्ता का दावेदार न माना जा रहा हो, फिर भी एक अहम भूमिका निभा सकती है। कई पार्टियों के बीच होने वाले इस कड़े मुकाबले में, एनटीके को मिलने वाले वोटों का हिस्सा उन सीटों के नतीजों पर असर डाल सकता है, जहां मुकाबला बेहद करीबी है।
सभी 234 सीटों के लिए 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी, जिसमें कुल 5.73 करोड़ वोटरों में से 4.88 करोड़ वोट डाले गए, यानी 85.10 प्रतिशत वोटिंग हुई। कुल 4,023 उम्मीदवार मैदान में हैं और 62 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती हो रही है।

