जिले के दो गांवों में एक बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसमें कथित तौर पर गैर-कृषि योग्य सरकारी भूमि को कृषि योग्य बताकर ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ (एमएफएमबी) पोर्टल पर पंजीकृत किया गया था।
जिला प्रशासन ने शंबली और अंपुर गांवों के सरपंचों को निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने श्मशान घाटों, विद्यालयों और चरागाहों से संबंधित गैर-कृषि योग्य भूमि को पंजीकृत कराने के लिए ओटीपी (आउट ऑफ ट्रेड डॉक्यूमेंट) उपलब्ध कराए और फिर अनाज मंडियों में उपज बेचकर मुनाफा कमाया।
जिन सरपंचों को निलंबित किया गया है, उनमें अमपुर के युद्धवीर और शंबली की किरणपाल कौर शामिल हैं।
निलंबन की पुष्टि करते हुए डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि पंचायतों की चल और अचल संपत्तियों को दोनों गांवों के बहुमत से निर्वाचित पंच को सौंप दिया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि शिकायतें मिली थीं कि दोनों सरपंचों ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए बंजर भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत कर दिया था, जिसके चलते जांच शुरू की गई। शिकायतों में कहा गया था कि सरकारी भूमि पर फसलें दिखाई गईं और मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेची गईं।
उन्होंने आगे कहा कि जांच में आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
उपायुक्त ने इस बात पर जोर दिया कि जांच पारदर्शी तरीके से की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया।

