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सीएसआईआर ने ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए मंडी में ‘प्रयोगशाला से भूमि तक’ सर्वेक्षण शुरू किया

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के स्मार्ट विलेज मिशन की ‘लैब टू लैंड’ पहल के तहत मंडी जिले के थुनाग क्षेत्र की झुंधी ग्राम पंचायत में घर-घर जाकर सर्वेक्षण शुरू हो गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सतत विकास को बढ़ावा देना, कौशल विकास करना और ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के अवसरों में सुधार करना है।

यह पहल विकसित भारत@2047 के विज़न के अनुरूप है और इसका उद्देश्य ग्रामीणों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों, स्थानीय संसाधनों, कौशल, आजीविका के तरीकों और विकास संबंधी आवश्यकताओं को समझना है। प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक और तकनीकी समाधानों की पहचान की जाएगी और उन्हें लागू किया जाएगा।

सीएसआईआर के स्मार्ट विलेज मिशन के तहत, ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए 17 सीएसआईआर प्रयोगशालाएं विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में सामूहिक रूप से काम कर रही हैं। इस मिशन का उद्देश्य प्रयोगशालाओं से नवाचारों और प्रौद्योगिकियों को सीधे ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाना है, साथ ही सतत, आत्मनिर्भर और स्थानीय रूप से प्रासंगिक विकास को बढ़ावा देना है।

झुंधी पंचायत में चल रहे इस कार्यक्रम का मार्गदर्शन सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक किशोर एस कुलकर्णी कर रहे हैं, जो सीएसआईआर स्मार्ट विलेज मिशन के नोडल समन्वयक हैं। इंजीनियर अनीश और गौरव सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीण परिवारों के साथ समन्वय कर रहे हैं और आजीविका के स्रोतों, कृषि और बागवानी पद्धतियों, स्थानीय संसाधनों, कौशल, रोजगार, आय, आवास की स्थिति और विकास प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी एकत्र कर रहे हैं।

झुंधी पंचायत और स्थानीय प्रतिनिधि घरों तक पहुंच को सुगम बनाकर और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करके फील्ड टीम को सक्रिय सहयोग दे रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को मिशन के उद्देश्यों से परिचित कराना और उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और आय सृजन के अवसरों से जोड़ना भी है।

सर्वेक्षण के माध्यम से एकत्रित जानकारी का विश्लेषण करके पंचायत के लिए आवश्यकता-आधारित कार्य योजना तैयार की जाएगी। मूल्यांकन के आधार पर, प्रशिक्षण कार्यक्रम, तकनीकी प्रदर्शन, कौशल विकास पहल और आजीविका संबंधी गतिविधियाँ प्राथमिकता के आधार पर शुरू की जाएंगी।

हस्तक्षेप के संभावित क्षेत्रों में पुष्पकृषि, मधुमक्खी पालन, कृषि एवं बागवानी, पोषण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और अन्य स्थानीय रूप से उपयुक्त आजीविका गतिविधियाँ शामिल हैं। मुख्य जोर ग्रामीणों को उनके मौजूदा कौशल और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में सक्षम बनाने के साथ-साथ स्थायी रोजगार और आय के अवसर सृजित करने पर होगा।

इस पहल का उद्देश्य सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, पंचायत और ग्रामीण समुदायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। पहचान की गई जरूरतों के आधार पर, वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों और संबंधित सरकारी योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से ग्रामीणों से जोड़ा जाएगा।

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