August 12, 2026
National

बिहार में शराबबंदी पर फिर बहस छिड़ी, मंत्री दिलीप जायसवाल बोले-संस्कार बेचकर विकास नहीं हो सकता

Debate over the liquor ban in Bihar has reignited; Minister Dilip Jaiswal stated that development cannot be achieved by compromising on values.

बिहार में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इसकी वजह एनसीएईआर अध्ययन की रिपोर्ट है, जिसमें शराबबंदी से होने वाले राजस्व नुकसान और अवैध शराब के कारोबार जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सिर्फ राजस्व बढ़ाने के लिए शराब की बिक्री को बढ़ावा देना सही रास्ता नहीं हो सकता।

शराबबंदी पर अपनी बात रखते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि रिपोर्ट में शराबबंदी और नशे की दूसरी प्रवृत्तियों को लेकर जो बातें कही गई हैं, वे पूरी तरह सही नहीं हैं। अगर दूसरे राज्यों के आधिकारिक आंकड़ों को देखा जाए तो बिहार में सूखे नशे का इस्तेमाल अभी भी कई राज्यों की तुलना में कम है। उन्होंने हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन जगहों पर नशे की समस्या को भी गंभीरता से देखने की जरूरत है।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा को लेकर रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर भी मंत्री ने अपनी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि शराब के नशे में होने वाली घरेलू हिंसा हमेशा सड़क पर दिखाई नहीं देती बल्कि कई बार घर की चारदीवारी के भीतर होती है। ऐसे में केवल सार्वजनिक जगहों पर अपराध के आंकड़ों को देखकर यह निष्कर्ष निकालना मुश्किल है कि शराबबंदी का महिलाओं की सुरक्षा पर कोई असर नहीं हुआ।

दिलीप जायसवाल ने शराबबंदी के आर्थिक पहलू पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि सरकार के लिए राजस्व जरूरी है लेकिन विकास के नाम पर शराब की बिक्री को बढ़ावा देना समाज के हित में नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लोगों को शराब की ओर धकेलना सही तरीका है?

मंत्री ने कहा कि शराब के नुकसान को लेकर सरकार, सामाजिक संगठनों और गैर सरकारी संस्थाओं को मिलकर अभियान चलाना चाहिए। विकास सिर्फ सड़क, पुल और दूसरी सुविधाएं बनाने का नाम नहीं है। अगर समाज में इंसानियत और सामाजिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है तो ऐसे विकास पर भी सवाल उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय गंभीर सामाजिक बहस की जरूरत है और यह समझना होगा कि समाज आखिर किस तरह का विकास चाहता है।

दिलीप जायसवाल ने झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े कथित पेपर लीक मामलों को लेकर चल रहे छात्रों के आंदोलन पर भी विपक्षी गठबंधन को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन हुआ था, तब उसे बदनाम करने की कोशिश की गई। राजनीतिक लोगों के शामिल होने से छात्रों के मुद्दे को अलग दिशा देने का प्रयास किया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर झारखंड के साथ-साथ कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में भी परीक्षा और पेपर लीक से जुड़े मामले सामने आते हैं, तो विपक्ष उन मुद्दों पर समान रूप से आवाज क्यों नहीं उठाता। उनका कहना है कि झारखंड में छात्रों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए।

15 अगस्त को लेकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर दिलीप जायसवाल ने कहा कि तिरंगा सिर्फ देश का झंडा नहीं बल्कि हर भारतीय के लिए गौरव, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही लोग ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ जैसे गीतों के जरिए तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना महसूस करते आए हैं।

Leave feedback about this

  • Service