किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में गुरुवार को भिवानी में उपायुक्त कार्यालय के सामने धरना दिया। अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले विरोध प्रदर्शन करते हुए उन्होंने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि भिवानी जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित किया जाए, विशेष गिरदावरी कराई जाए, प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाए और फसल क्षति के पंजीकरण के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ और ‘क्षतिपूर्ति’ पोर्टल तत्काल खोले जाएं।
किसान सभा के जिला सचिव जग रोशन ने कहा कि अत्यधिक कम वर्षा, नहर के पानी की अपर्याप्त उपलब्धता और अधिकांश क्षेत्रों में खारे भूजल के कारण कपास, बाजरा, मूंग, धान और मूंगफली सहित खरीफ की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि विभाग और फसल बीमा कंपनियों को फसल कटाई के प्रयोग जल्द से जल्द पूरे करने चाहिए, किसानों को सूखी फसलें हटाने और रबी की फसलें बोने का अवसर प्रदान करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा दावों के प्राप्ति में कोई बाधा न आए।
किसानों ने यह भी मांग की कि मंडियों में बाजरा और बावानी खेड़ा तथा अन्य मंडियों में धान की सरकारी खरीद तत्काल शुरू की जाए ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिल सके। उन्होंने नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ने की भी मांग की।
किसान सभा के नेता ने कहा कि सूखे जैसी स्थिति के कारण फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। फसल खराब होने के कारण किसान कर्ज में डूबने को मजबूर हैं, इसलिए वे प्रशासन से फसलों की गिरदावरी कराने की बार-बार मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस मामले में उदासीन बनी हुई है।
किसान सभा ने कहा कि अगर प्रशासन किसानों को दिए गए आश्वासन के अनुसार तीन दिनों के भीतर कार्रवाई करने में विफल रहता है, तो वे आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होंगे।

