July 18, 2026
National

देहरादून: ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बोले राहुल गांधी- भारत में पेपर लीक आम बात, पूरा शिक्षा सिस्टम शामिल

Dehradun: Rahul Gandhi speaks at the ‘Students’ Voice’ event—paper leaks are common in India; the entire education system is involved.

उत्तराखंड के देहरादून में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के साथ संवाद किया। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में पेपर लीक होना आम बात हो गई है और पूरा शिक्षा सिस्टम इसमें शामिल है, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। देहरादून में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्रों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था सरकार-केंद्रित है, जबकि अब भारत को छात्र-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि एक छात्र पांच साल तक रोजाना 10 घंटे तैयारी करता है और औसतन उसके परिवार का 9 लाख रुपए खर्च होता है। इसके बावजूद पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए हैं। सीट और नौकरी का “रेट कार्ड” बन गया है, लेकिन अब तक किसी को सजा नहीं मिली। इससे 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इस भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था को जड़ से बदलने की जरूरत है। 21वीं सदी की ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनानी होगी, जो स्वतंत्र और जवाबदेह हो तथा छात्रों को पूरी सुरक्षा दे।

उन्होंने कहा कि छात्रों के सामने दो रास्ते हैं। पहला रास्ता ईमानदारी और मेहनत का है। इस रास्ते पर चलने के लिए पांच साल तक रोजाना आठ घंटे मेहनत करनी पड़ती है। इसके साथ आर्थिक बोझ, परिवार का दबाव और उम्र सीमा जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। दूसरा रास्ता पेपर लीक का है। अगर किसी के पास पैसा है, वह भ्रष्ट है और ईमानदारी से नहीं, बल्कि चोरी करके आगे बढ़ना चाहता है, तो उसके लिए एक दूसरा छिपा हुआ रास्ता है, जो पेपर लीक का रास्ता है।

राहुल गांधी ने कहा कि इस रास्ते पर चलने के लिए पहला नियम यह है कि माता-पिता गरीब या मध्यम वर्ग के नहीं होने चाहिए। दूसरा, ईमानदारी से काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 99.9 प्रतिशत छात्र ईमानदारी का रास्ता चुनते हैं, लेकिन कुछ लोग व्यवस्था का इस्तेमाल कर पेपर लीक के रास्ते का फायदा उठाते हैं, जिससे बाकी सभी युवाओं को नुकसान होता है।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले 10 वर्षों में 7 करोड़ से अधिक छात्र इससे प्रभावित हुए हैं। इस दौरान 152 पेपर लीक हुए, यानी औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि इस मामले में दोष सिद्ध होने की दर शून्य है। इस अपराध के लिए आज तक एक भी व्यक्ति जेल नहीं गया और न ही किसी को सजा मिली है।

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