पालमपुर शहर में चल रही सीवरेज परियोजना के धीमे काम ने आम जनता के लिए विकास का प्रतीक बनने के बजाय परेशानी का बड़ा कारण बन गया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), स्थानीय नगर निगम और जल शक्ति विभाग इस परियोजना में शामिल हैं, लेकिन समन्वय, निगरानी और जवाबदेही की स्पष्ट कमी दिखाई देती है। काम का जिम्मा सौंपी गई निर्माण कंपनी प्रभावी पर्यवेक्षण के बिना ही काम करती नजर आ रही है।
परियोजना की प्रगति इतनी धीमी है कि मात्र 200 से 500 मीटर के एक हिस्से पर तीन से चार महीने से चल रहा काम अभी तक अधूरा है। बुटैल चौक से मंगलानी चौक और न्यूगल कैफे तक 300 से 400 मीटर का एक हिस्सा चार महीने पहले खोदा गया था, लेकिन वहां बहुत कम काम हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर परियोजना पर काम इसी गति से चलता रहा, तो पालमपुर में सीवरेज लाइन बिछाने में लगभग पांच साल लग सकते हैं।
कई निवासियों का कहना है कि ठेकेदार के पास परियोजना को शीघ्रता से पूरा करने के लिए पर्याप्त जनशक्ति या आवश्यक उपकरण नहीं हैं। कई लोगों का मानना है कि या तो परियोजना को क्रियान्वित करने वाली कंपनी प्रशासनिक नियंत्रण से परे है या उसे संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई का कोई डर नहीं है। एक जगह पर सड़क खोदी गई है लेकिन काम बीच में ही छोड़ दिया गया है जबकि काम अचानक दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे कई हिस्से अधूरे रह गए हैं।
लापरवाही भरे काम के कारण पालमपुर की सड़कें दयनीय स्थिति में हैं। गहरे गड्ढे, ढीली मिट्टी, धूल और कीचड़ ने वाहनों की आवाजाही को बेहद मुश्किल बना दिया है। कई इलाकों में निवासियों का कहना है कि उनके वाहन महीनों तक घरों में ही खड़े रहते हैं और सड़क पर चलना भी जोखिम भरा हो गया है।
लोगों का आरोप है कि जिन सड़कों पर सीवरेज का काम पूरा हो चुका है, वहां प्रशासन ने मरम्मत और रखरखाव में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है, जिससे धूल और कीचड़ के कारण रोजाना असुविधा होती है। स्थिति इतनी गंभीर है कि चिकित्सा आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिससे जान को खतरा हो सकता है।
लोग खुलेआम प्रशासन की आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि न तो अधिकारियों में जवाबदेही है और न ही ठेकेदार के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की गई है। सड़कों की खुदाई मनमाने ढंग से की जा रही है और जनता को होने वाली असुविधा की परवाह किए बिना काम को मनमाने ढंग से रोक दिया जाता है। जनता का गुस्सा प्रशासन की ओर निकल रहा है, जबकि कुप्रबंधन के दोषी अधिकारी बिना किसी सजा के बच निकले हैं।
स्थानीय विधायक आशीष बुटैल का कहना है कि मैनहोल के डिज़ाइन उपलब्ध न होने के कारण सीवरेज परियोजना में देरी हुई है। अब सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग (आईपीएच) ने डिज़ाइन को अंतिम रूप दे दिया है और निर्माण कार्य में तेज़ी आएगी। उनका कहना है कि परियोजना को पूरा करने के लिए एक स्पष्ट समयसीमा तय की जानी चाहिए, अधिकारियों और ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और निवासियों को हो रही असुविधा को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गर्मी शुरू होने से पहले सभी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कर दी जाएगी।

