January 31, 2026
National

दिल्ली पुलिस ने ग्रेटर कैलाश में जमीन हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया, तीन आरोपी गिरफ्तार

Delhi Police busted a gang of land grabbers in Greater Kailash, three accused arrested

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की सदर्न रेंज ने ग्रेटर कैलाश-1 इलाके में जमीन हड़पने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह जाली दस्तावेजों और धोखाधड़ी वाली कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए प्राइम रिहायशी संपत्तियों, खासकर बुजुर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने की साजिश रचता था।

मामले की शुरुआत तब हुई जब ग्रेटर कैलाश के एक निवासी ने शिकायत की कि एक राष्ट्रीय अखबार में प्रकाशित एक फर्जी सार्वजनिक नोटिस में अज्ञात लोगों ने उनकी पैतृक संपत्ति पर गलत मालिकाना हक का दावा किया था। जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता और उनका परिवार दशकों से इस संपत्ति पर कानूनी कब्जे में था। उनके पास रजिस्टर्ड सेल डीड और गिफ्ट डीड जैसे वैध दस्तावेज थे। इस शिकायत पर ग्रेटर कैलाश पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई, जिसे आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर विजय पाल दहिया को सौंपी गई।

जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह बुजुर्गों और कमजोर मालिकों की संपत्तियों को निशाना बनाता था। वे जाली दस्तावेज तैयार करते थे, जिसमें फर्जी रिलीज डीड, मनगढ़ंत वसीयत और सेल डीड शामिल होती थीं। इन दस्तावेजों से वे मालिकाना हक की झूठी श्रृंखला बनाते थे। इसके बाद अदालतों में सिविल मुकदमे दायर कर धोखाधड़ी वाले दावों को वैधता देने की कोशिश करते थे। गिरोह काल्पनिक गवाह पेश करता था, जिनमें कुछ मृत व्यक्ति शामिल थे और कुछ के गलत या नकली पते दिए जाते थे।

इस खास मामले में आरोपियों ने शिकायतकर्ता की ग्रेटर कैलाश वाली संपत्ति पर दो सेट जाली दस्तावेज तैयार किए थे। इनमें फर्जी वसीयत और सेल डीड शामिल थीं, ताकि संपत्ति पर कब्जा कर उसे किसी अनजान खरीदार को बेचा जा सके। शिकायतकर्ता को तब पता चला जब उनके रिश्तेदार ने आरोपी विनीत सहगल द्वारा जारी फर्जी क्लासिफाइड विज्ञापन देखा। उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और एफआईआर दर्ज हुई।

एसीपी वी.के.पी.एस यादव की देखरेख में इंस्पेक्टर विजय पाल दहिया, एसआई अनुराग त्यागी, एसआई राजेश कुमार और एचसी विपिन की टीम ने गहन जांच की। 22 जनवरी 2026 को तीन आरोपियों आशीष चौधरी, विनीत कुमार सहगल और दिलीप कुमार पांडे को गिरफ्तार किया गया। यह मामला ग्रेटर कैलाश-1 पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 329(4), 62, 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत दर्ज है।

पुलिस हिरासत रिमांड के दौरान जाली मूल दस्तावेज बरामद और जब्त किए गए। जांच से पता चला कि गिरोह बुजुर्गों की कमजोरियों का फायदा उठाता था। आशीष चौधरी एक प्रैक्टिसिंग वकील है, जबकि दिलीप पांडे का पहले से आपराधिक इतिहास है और वह कई मामलों में शामिल रहा है।

पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने, अन्य साथियों की तलाश करने और इसी तरह के अन्य मामलों की जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या इसी तरीके से और संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। यह कार्रवाई संपत्ति धोखाधड़ी के खिलाफ पुलिस की सख्ती को दिखाती है और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

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