कांग्रेस के सांसद हिबी ईडन और मणिक्कम टैगोर बी ने बुधवार को लोकसभा में नोटिस प्रस्तुत कर नीट-यूजी 2026 और यूजीसी नेट परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और सुरक्षा की रक्षा करने में भारत सरकार की विफलता, दिल्ली में विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ मनमाने ढंग से एफआईआर दर्ज किए जाने पर चर्चा करने की मांग की।
लोकसभा स्पीकर को संबोधित करते हुए सांसद मणिक्कम टैगोर बी ने लिखा, “नीट-यूजी 2026 और यूजीसी-नेट परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं से उत्पन्न लगातार संकट के परिणामस्वरूप छात्रों के बहुमूल्य जीवन का नुकसान, 23 लाख से अधिक छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा करने में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की घोर विफलता और इसके बाद दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाने पर सदन सामान्य कामकाज को रोककर चर्चा किए जाने की आवश्यकता है।
लाखों उम्मीदवारों के लिए आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई, जिसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के अधिकारी भी शामिल पाए गए। इसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी और देश भर में मची खलबली के बीच इसे दोबारा आयोजित करना पड़ा।
यूजीसी-नेट परीक्षा में भी इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आईं, जिससे भारत की केंद्रीय टेस्टिंग संस्थाओं की विश्वसनीयता पर संकट गहरा गया और राष्ट्रीय परीक्षाओं की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा डगमगा गया। इस स्थिति से पैदा हुए तनाव, अनिश्चितता और अन्याय के कारण कई छात्रों के आत्महत्या करने की खबरें सामने आई हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने खुद सार्वजनिक रूप से संस्थागत विफलता को स्वीकार किया है फिर भी उन्होंने इस्तीफा देकर नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है।
प्रणालीगत सुधारों के बार-बार आश्वासनों के बावजूद, कोई निश्चित परीक्षा कैलेंडर, एनटीए का संरचनात्मक सुधार, या पीड़ित मुआवजा ढांचा लागू किया गया है। जो छात्र और नागरिक समाज समूह अपना विरोध दर्ज कराने के लिए संसद तक शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे, उन पर बल प्रयोग किया गया और बाद में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं। इस तरह युवा नागरिकों के जायज़ लोकतांत्रिक विरोध को आपराधिक बना दिया गया, जबकि सरकारी विफलता के कारण उनका भविष्य पहले ही खतरे में पड़ चुका है।
सांसद मणिक्कम टैगोर बी ने लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में कहा, “मैं आग्रह करता हूं कि सदन की कार्यवाही स्थगित की जाए ताकि निम्नलिखित मांगों पर चर्चा हो सके। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा देते हुए अपनी देखरेख में परीक्षा की शुचिता के पूरी तरह विफल होने की नैतिक जिम्मेदारी लें। परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों के शैक्षणिक भविष्य व जीवन की रक्षा करने में सरकार की विफलता पर संसद में पूरी और समय-सीमा के भीतर चर्चा हो। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को तुरंत वापस लिया जाए और यह आश्वासन देना कि छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध से निपटने के लिए पुलिस या कानूनी दबाव का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यह गंभीर और तत्काल सार्वजनिक चिंता का विषय है, जो भारत के युवाओं का सरकारी तंत्र में जो भरोसा है, उससे सीधे जुड़ा है। इसलिए मेरा अनुरोध है कि सदन के सामान्य कामकाज को अलग रखकर इसे वह प्राथमिकता दी जाए।”
वहीं, सांसद हिबी ईडन ने लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में कहा, “मैं संसद के पास विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तत्काल सार्वजनिक महत्व के मामले पर चर्चा करने के लिए ‘स्थगन प्रस्ताव’ पेश करने के अपने इरादे की सूचना देता हूं। यह सदन हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की परेशान करने वाली खबरों पर मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता, जो देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में कमियों के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे थे।”
उन्होंने आगे कहा, “कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से न्याय की मांग कर रहे छात्रों का सामना दिल्ली पुलिस द्वारा जरूरत से अधिक और गैर-कानूनी बल प्रयोग से हुआ। सामने आई ये घटनाएं भारत के संविधान के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा करती हैं। विरोध प्रदर्शन से जिस तरह से निपटा गया, उसने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है और यह उन लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, जिन्हें बनाए रखने के लिए संसद बाध्य है। इन घटनाओं पर केंद्र सरकार की लगातार चुप्पी ने जनता की चिंता को और बढ़ा दिया है। सदन को इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि क्या ऐसी पुलिस कार्रवाई उचित थी, इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो। मामले की गंभीरता को देखते हुए, मेरा आग्रह है कि इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा करने के लिए सदन के अन्य सभी कामकाज स्थगित कर दिए जाएं।”

