मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा राज्य की सत्ता में कांग्रेस के आने पर अनुसूचित जाति और जनजाति का मुख्यमंत्री बनाए जाने संबंधी बयान की चौतरफा चर्चा है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान का हितैषी करार दिया है।
दरअसल, बीते रोज पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भोपाल डिक्लेरेशन पर चर्चा के दौरान राज्य में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग का मुख्यमंत्री कांग्रेस की ओर से बनाए जाने की पैरवी की थी। उनके इस बयान के बाद से सियासी गर्माहट है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अहिरवार ने उन्हें पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल को सामाजिक न्याय और उत्थान के लिए याद किया जाएगा।
कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने संवेदनशील, लोकतांत्रिक, समतामूलक वक्तव्य के लिए दोनों वर्गों की ओर से दिग्विजय सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वास्तव में यह बयान सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दर्शाता है।
अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष अहिरवार ने आगे लिखा कि राज्य की लगभग 17 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति है और इसकी भावना और अपेक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। यह न केवल सामाजिक संतुलन और संवैधानिक भावना के अनुरूप होगा बल्कि दलित समाज के आत्मसम्मान और राजनीतिक सहभागिता को भी व्यक्त करेगा।
इस पत्र में आगे कहा गया है कि दिग्विजय सिंह के अनुभव, मार्गदर्शन और प्रभावशाली भूमिका के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष इस संदर्भ में पहल भी की जाएगी और सामाजिक न्याय की आवाज को मजबूती प्रदान की जाएगी। यहां यह बताना लाजमी होगा कि दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल इसी साल अप्रैल में समाप्त हो रहा है और दिग्विजय सिंह ने आगे राज्यसभा में न जाने की इच्छा जताई है। इसके चलते ही राज्य में एक बार फिर कांग्रेस के भावी दावेदारों के नाम की चर्चा शुरू हो गई है।


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