N1Live National दिलीप घोष का आरोप- ‘बंगाल सरकार नहीं चाहती सही तरीके से हो एसआईआर, पूरे राज्य में बिगड़े हालात’
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दिलीप घोष का आरोप- ‘बंगाल सरकार नहीं चाहती सही तरीके से हो एसआईआर, पूरे राज्य में बिगड़े हालात’

Dilip Ghosh alleges, "The Bengal government doesn't want the SIR to be conducted properly, and the situation has deteriorated across the state."

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के खिलाफ लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार स्वयं नहीं चाहती कि राज्य में एसआईआर सही तरीके से हो।

भाजपा नेता दिलीप घोष ने बुधवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर हालात खराब हो गए हैं। हर जगह झड़पें, अशांति और गड़बड़ी हो रही है। एसआईआर पूरे देश में हो रहा है, लेकिन ऐसी स्थिति कहीं और नहीं दिख रही है।

उन्होंने कहा कि बंगाल में एसआईआर करने वाले कर्मचारी राज्य सरकार के हैं। कानून व्यवस्था भी राज्य सरकार के हाथ में है। इसलिए जिम्मेदारी भी राज्य सरकार को लेनी होगी। दिलीप घोष ने आरोप लगाए कि ममता बनर्जी की सरकार नहीं चाहती है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर सही तरीके से हो। जब तक एसआईआर सही तरीके से नहीं होता है, चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं होनी चाहिए।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि बंगाल में मौजूदा हालात ऐसे हैं कि लोगों को हर चीज के लिए कोर्ट जाना पड़ता है। तो फिर यहां सरकार किस लिए है? यहां कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। ऐसा लगता है कि संविधान का अस्तित्व ही नहीं है। हर घटना सरकार के कंट्रोल से बाहर है और सरकार भी घटनाओं की जांच करने के पक्ष में नहीं है।

पिछले दिन पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों में फॉर्म 7 जमा करने को लेकर तनाव बना रहा। इस दौरान तृणमूल और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। हुगली के मोगरा में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मांग की कि उन्हें केंद्रीय सुरक्षा बल की मौजूदगी में फॉर्म 7 जमा करने का मौका दिया जाए। एक दिन पहले मोगरा में बीडीओ ऑफिस के अंदर तनाव तब फैल गया, जब कथित तौर पर तृणमूल कार्यकर्ताओं ने भाजपा समर्थकों को भगा दिया, जो फॉर्म लेकर वहां गए थे। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने भी अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए।

इसी बीच, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि टीएमसी सरकार के इशारे पर काम करने वाली पश्चिम बंगाल पुलिस अमित मंडल जैसे एक बेगुनाह नागरिक और चुने हुए प्रतिनिधि (पंचायत) को सिर्फ फॉर्म 7 भरने के लिए उन पर केस दर्ज करके कैसे गिरफ्तार कर सकती है, जबकि यह चुनावी लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया में एक बिल्कुल जरूरी और कानूनी प्रक्रिया है?

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ लोकतंत्र पर हमला नहीं है, बल्कि यह भारत के चुनाव आयोग की अथॉरिटी का खुला मजाक है।

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